एनएचआरसी प्रमुख न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि प्राचीन भारतीय मूल्य लोगों को प्रकृति में सभी तत्वों की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। ये पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। नैतिकता से रहित प्रौद्योगिकी पर्यावरण और पृथ्वी पर जीवन के लिए विनाशकारी होगी।
एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने बुधवार को यूएपीए को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम जैसे कुछ विशेष कानून मानवाधिकारों को छीनने के लिए नहीं बनाए गए हैं। बल्कि ये मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हैं। उन्होंने सीआईएसएफ और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एनएचआरसी की 27वीं वार्षिक वाद-विवाद प्रतियोगिता में ये बयान दिया।
विज्ञापन
एनएचआरसी ने इस बाबत एक बयान भी जारी किया। एनएचआरसी प्रमुख न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने इस कार्यक्रम में कहा कि एक विरोधी से निपटने में आनुपातिक बल का उपयोग करने की अवधारणा "मानव धर्म" के भारतीय विचार में अंतर्निहित है। मानव अधिकारों का प्रचार और संरक्षण भारतीय संस्कृति, दर्शन और अभ्यास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी उत्पत्ति प्राचीन भारतीय शास्त्रों में 'ऋग्वेद' के ठीक बाद से हुई है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि रामायण काल में भी यह विचार सामने आया। जब भगवान राम ने लक्ष्मण को युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर विनाश के हथियार के बजाय आनुपातिक बल का उपयोग करने की सलाह दी थी। ऐसा ही महाभारत काल में भी सिद्धांतों के आधार पर युद्ध लड़े जाते थे।
अपने संबोधन में एनएचआरसी प्रमुख न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि प्राचीन भारतीय मूल्य लोगों को प्रकृति में सभी तत्वों की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। ये पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। नैतिकता से रहित प्रौद्योगिकी पर्यावरण और पृथ्वी पर जीवन के लिए विनाशकारी होगी। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा करने और नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की भी सराहना की।