राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को कहा कि औद्योगिक विकास लोगों की जान से बढ़कर नहीं हो सकता। एनजीटी ने यह बात हरियाणा सरकार को प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों के निरीक्षण की अवधि को कम करने का निर्देश देते हुए कही।
पीठ ने वायु और पानी की गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए कहा कि औद्योगिक विकास सतत तरीके से जरूरी है लेकिन वायु और पानी को प्रदूषित करके नहीं क्योंकि ये दोनो जीवन जीने के लिए जरूरी है।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के संबंध में निरीक्षण की अवधि में कमी लाने की जरूरत है और आवृत्ति बढ़ाने की जरूरत है।
पीठ ने कहा, नौकरशाही प्रक्रियाओं में छूट, उसे सरल एवं आसान बनाने और औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने पर कोई आपत्ति नहीं हो सकती लेकिन ऐसी पहल को वायु एवं पानी की गुणवत्ता में गिरावट के संदर्भ में संतुलित किया जाना चाहिए।
एनजीटी ने कहा कि कम प्रदूषण फैलाने वाले हरित श्रेणी में भी निगरानी जरूरी है जिससे यह पता चल सके कि ‘‘हरित’’ दर्जे का सही तरीके से इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।