नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने की आरोपी जर्मन की प्रमुख ऑटो निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन को देश में 3.32 लाख से ज्यादा वाहनों की वापसी (रिकॉल) का खाका पेश करने का आदेश दिया है।
जस्टिस जावद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची व एडवोकेट संजीव आइलावाडी के मामले पर सुनवाई कर यह निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि एआरएआई व अन्य पक्षकार वाहनों के रिकॉल का रोडमैप पेश करें। मामले पर अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।
ऑटोमोटिस रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) की जांच में कंपनी के भारत स्टेज - 4 उत्सर्जन मानक वाले कुछ वाहनों में 1.1 से 2.6 गुना ज्यादा उत्सर्जन रिकॉर्ड किया गया था। वहीं एआरएआई की जांच के बाद फॉक्सवैगन इंडिया ने दिसंबर,2015 में 3,23,700 लाख ईए 189 डीजल वाहनों को स्वत: ही रिकॉल करने का फैसला किया था। हालांकि अभी तक कंपनी ने इन वाहनों को रिकॉल नहीं किया। कंपनी पर आरोप है कि वह एक सॉफ्टवेयर के जरिए उत्सर्जन मानकों को प्रभावित करती है।
वहीं कंपनी यह स्वीकार कर चुकी है कि यूएस, यूरोप और दुनिया के अन्य बाजारों में उसके जरिए बेची गई 1 करोड़ 10 लाख डीजल वाहनों में एक डिवाईस लगा है जो वाहनों के उत्सर्जन जांच परिणाम को प्रभावित करता है। यह डिवाईस बेहतर उत्सर्जन परिणाम में मददगार है। हालांकि भारत के संबंध में कंपनी ने इन आरोपों को खारिज किया था।