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एनजीटी ने सीजीडब्ल्यू के सीईओ को किया तलब, व्यक्तिगत तौर पर पेश होने का आदेश

Wed, 22 Jan 2020 03:06 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडबल्यूए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)को उसके समक्ष व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने पाया कि गाजियाबाद और नोएडा के कई बिल्डरों को भूजल दोहन के लिए दी गई अनापत्ति पत्र के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में कई खामियां हैं। यह आदेश एनजीटी अध्यक्ष न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने दिया।

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पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमने पाया कि सीजीडब्ल्यूए द्वारा भूजल दोहन के लिए दिए गए अनापत्ति पत्र में निर्देशों के अनुपालना में कई कमियां हैं। इन खामियों का पता लग जाने के बावजूद सीजीडब्ल्यूए जरूरी कार्रवाई करने में नाकाम रहा। यह स्थिति कई मामलों में सामने आई है, इसलिए जरूरी है कि सीजीडब्ल्यूए के सीईओ स्वयं पीठ के समक्ष उपस्थित होकर यह आश्वस्त करें कि ऐसे उल्लंघन के मामलों को रोकने व उनकी निगरानी रखने के लिए प्रभावी प्रणाली है। इसके बिना सीजीडब्ल्यूए को सौंपे गए नियामक कार्यों का कोई मतलब नहीं होगा।

पीठ का यह आदेश यूपी निवासी महकार सिंह की याचिका पर आया। उन्होंने याचिका में आरोप लगाया था कि गाजियाबाद में वेव सिटी और नोएडा के हाई टेक सिटी परियोजना के लिए पर्यावरण से अनापत्ति पत्र लिए बिना पेड़ों काकटान, भूजल का दोहन कर निर्माण किया जा रहा है। 
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने पीठ को बताया कि वेव सिटी टाउनशिप के पहले चरण के तहत तैयार इलाके में अभी 40-50 परिवार रह रहे हैं। यहां सीवेज ट्रीटमेंट  के लिए आठ कॉम्पैक्ट सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं, जिनका परिचालन नहीं हो रहा है। एसटीपी के इनलेट में सीवेज नहीं मिला। इसके साथ ही निरीक्षण के दौरान वहां न तो ठोस कचरे के निस्तारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी और न ही धूल उत्सर्जन से निपटने के लिए कोई प्रणाली। अत: यहां पर्यावरण मंजूरी के लिए लगाए गए प्रस्तावों की अनुपालना नहीं की गई है।

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दिल्ली सरकार को निर्देश, वन भूमि पर नहीं दी जा सकती अवैध कब्जे की अनुमति

एनजीटी ने दिल्ली सरकार को दक्षिण दिल्ली के जौनपुर और डेरा मंडी वन क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश देते हुए कहा है कि वन भूमि पर अवैध कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निगरानी उच्च स्तर पर होनी चाहिए ताकि अतिक्रमण हटाए जा सकें और भूमि को उसकी मूल स्थिति में छोड़ दिया जाए।

एनजीटी ने दिल्ली सरकार को एक ईमेल द्वारा अगली तारीख से पहले एक रिपोर्ट दाखिल करने के भी निर्देश दिया। साथ ही पीठ ने इस मामले में तेजी के साथ कदम उठाए जाने की बात कही है। न्यायाधिकरण दक्षिण दिल्ली निवासी अमरजीत सिंह नलवा और अन्य द्वारा 2015 के एनजीटी के आदेश पर अमल करते हुए दिल्ली सरकार को अतिक्रमण हटाने का निर्देश देने की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
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