पीठ में न्यायिक सदस्य जस्टिस सुधीर कुमार अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल हैं। एनजीटी ने कहा कि टीपीयू को शून्य-तरल और शून्य-उत्सर्जन मानदंडों का पालन करने की जरूरत है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण मानदंडो का उल्लंघन करने पर टायर पायरोलिसिस इकाइयों (टीपीयू) को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। हरित अधिकरण ने सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट (सेफ) की ओर से अपशिष्ट टायरों के अनुचित प्रबंधन के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आदेश जारी किया।
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एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की पीठ ने कहा, नियमों का पालन नहीं करने वालीं इकाइयों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से इकाइयों के खिलाफ की गई कार्रवाई में बहुत ज्यादा देरी हुई, जिससे यह अंतराल (गैप) बढ़ गया। ऐसे में अब इन टीपीयू को तत्काल बंद किया जाए।
पीठ में न्यायिक सदस्य जस्टिस सुधीर कुमार अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल हैं। एनजीटी ने कहा कि टीपीयू को शून्य-तरल और शून्य-उत्सर्जन मानदंडों का पालन करने की जरूरत है।
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वहीं इस प्रक्रिया के दौरान पैदा हो रहे कार्बन को लैंडफिल में भेजने की जगह सीमेंट उद्योगों में उपयोग करने की आवश्यकता है। आदेश देते हुए एनजीटी ने कहा कि सीपीसीबी और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एक महीने के अंदर टीपीयू के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप देगा।