राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अमरोहा की एक औद्योगिक इकाई से पर्यावरण संरक्षण के नियमों के गंभीर उल्लंघन के लिए 1.90 करोड़ रुपये वसूलने का निर्देश दिया है।
सीएल गुप्ता एक्सर्पोर्ट लिमिटेड नाम की इस इकाई को नियम का उल्लंघन कर रामगंगा नदी को प्रदूषित करने का दोषी पाया गया है। एनजीटी ने आदेश अमल में लाने की रिपोर्ट 30 नवंबर तक पेश करने को कहा है।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने एक समिति द्वारा प्रस्तुत रपट का हवाला देते हुए कहा है कि इस इकाई को केवल पीने और घर के काम के लिए रोज 155 हजार लीटर भूगर्भ जल निकालने की अनुमति थी। इकाई ने इसका उल्लंघन किया।
पीठ ने पाया है कि कंपनी ने घरेलू उपयोग के नाम पर जमीन से पानी का दोहन करने की अनुमति लेकर उसका इस्तेमाल औद्योगिक काम के लिए किया। पीठ ने यह भी टिप्पणी की है कि इस इकाई के पास जल अपशिष्ट शोधन संयंत्र भी नहीं था।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्र बोर्ड (सीपीसीबी) की एक संयुक्त समिति की समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन के बाद कंपनी से पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए 1.90 करोड़ रुपये की वसूली करने का फैसला किया गया। हालांकि, समिति ने इकाई पर पहले 2.49 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात कही थी।