अपने आदेश में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा, यह मीडिया रिपोर्ट पर्यावरण कानूनों के अनुपालन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और प्रदूषण नियंत्रण समितियों में कर्मचारियों की वास्तविक संख्या की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही पीठ ने पर्यावरण प्रयोगशालाओं में बुनियादी ढांचे के संबंध में भी रिपोर्ट मांगी है।
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अपने आदेश में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा, यह मीडिया रिपोर्ट पर्यावरण कानूनों के अनुपालन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। साथ ही यह भी कहा कि रिपोर्ट में पिछले दो वर्षों (2020-2021 और 2021-2022) में बजट की उपलब्धता और उसके स्रोतों और व्यय को भी शामिल किया जाना चाहिए।
बता दें कि एनजीटी ने यह आदेश एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेने के बाद जारी किया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि देश भर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के पास काम करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इतना ही नहीं, मीडिया रिपोर्ट में बोर्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर दावा किया गया था कि उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही इसमें तकनीकी पदों पर बड़ी संख्या में खाली पदों और उचित प्रशिक्षण का अभाव के मुद्दे पर जोर दिया गया था।
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इस रिपोर्ट के आधार पर ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड सीसी) के सचिव के माध्यम से सीपीसीबी की केंद्रीय और क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया। फिलहाल, मामले को 2 फरवरी को आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया गया है।