इन दिनों देश में यूसीसी को लेकर काफी चर्चा गर्म है। कोई यूसीसी को लेकर चिंता जाहिर कर रहा है तो कोई इसका समर्थन कर रहा है। वहीं अब दिव्यांग अधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने विधि आयोग से आग्रह किया है कि वह दिव्यांग लोगों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े मौजूदा कानूनों के साथ यूसीसी में शामिल करें।
लगभग 220 दिव्यांग अधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दिए सुझाव
यूसीसी को लेकर विधि आयोग ने जनता की राय जानी है, जिसमें दिव्यांग अधिकार संगठनों ने भी अपनी बात रखी है। विधि आयोग को लगभग 220 दिव्यांग अधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दिव्यांगता के दृष्टिकोण से अपनी चिंताओं को जाहिर किया और सुझाव दिए।
दिव्यांगों की अधिकारों की रक्षा करने पर दिया जोर
प्रमुख कार्यकर्ताओं, अधिवक्त्ताओं और दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा समर्थित, उनके अनुरोध पत्र में दिव्यांगों (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि यूसीसी को अंतिम रूप में देते समय उनकी आवाज सुनी जाए। दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं ने दिव्यांगों के सामने आने वाली समस्याओं को दूर करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है।
दिव्यांग अधिकार संगठनों ने यूसीसी को दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा करने वाले मौजूदा कानूनों जैसे दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के साथ संबद्ध करने के महत्व पर जोर दिया गया। इन समूहों ने अनुरोध पत्र में चिंता व्यक्त की कि यूसीसी यदि विचार किए बिना लागू किया गया, तो दिव्यांग व्यक्ति प्रभावित हो सकते हैं।
अनुरोध पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में ये लोग शामिल
अनुरोध पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में मुरलीधरन (दिव्यांगों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय मंच के महासचिव), रोमा भगत (वकील, दिल्ली उच्च न्यायालय) और साधना आर्य (दिव्यांगता कार्यकर्ता) आदि शामिल हैं। सबमिशन का समर्थन करने वाले संगठनों में एनपीआरडी, मल्टीपल स्केलेरोसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया - चेन्नई चैप्टर, एक्शन फॉर ऑटिज्म, और शिशु सरोथी सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन एंड ट्रेनिंग फॉर मल्टीपल डिसेबिलिटी शामिल हैं।