पीएफ निकालने संबंधी नए नियम से लोग इतने खफा हैं कि इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। बेंगलुरु के कपड़ा उद्योग के श्रमिकों की तरफ से किए जा रहे प्रदर्शन ने मंगलवार को हिंसक रूप ले लिया। वहां काफी पथराव किया गया और कई वाहनों में आग लगा दी गई।
पीएफ निकालने को लेकर नए नियम के विरोध में सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी मैसूर-बेंगलुरु हाईवे पर उतर आए और हाईवे को ब्लॉक कर दिया। इसके चलते भयंकर जाम भी लग गया। वहां से आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
वहीं पीएफ पर नए नियमों पर मचे बवाल के बीच सरकार ने भी कदम पीछे खींच लिए। केन्द्र सरकार ने पीएफ निकालने के नियमों में बदलाव कर दिया है। श्रम मंत्रालय के अनुसार कोई भी खाताधारक इलाज, घर खरीदने, शादी और बच्चों की पढ़ाई के लिए अपने पीएफ खाते में जमा पूरे पैसे निकाल सकता है।
मौजूदा नियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति नौकरी छोड़ने के दो महीने बाद अपने पीएफ के पूरे पैसे निकाल सकता था। साथ ही, नौकरी के दौरान कोई भी 54 साल की उम्र में पीएफ निकाल सकता है। हालांकि, यह नियम सिर्फ 30 अप्रैल तक लागू है।
पाक जेल में मारे गए किरपाल का शव पहुंचा भारत
पाक जेल में मारे गए किरपाल सिंह का शव भारत पहुंचा
- फोटो : फाइल फोटो
पाकिस्तान जेल में मारे गए पंजाब के किरपाल सिंह का शव भारत पहुंच चुका है। वाघा बॉर्डर पर पाक अधिकारियों ने शव भारतीय अधिकारियों को सौंपा। उसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। किरपाल सिंह के परिजनों की मांग है कि उसके शव का पोस्टमार्टम कराकर मौत के असली कारणों का पता लगाया जाए।
किरपाल सिंह पंजाब के गुरदासपुर जिले के मुस्तफाबाद सैंदा के रहने वाले थे और 1991 से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल बंद थे। दो साल बाद घर आए पत्र में पता चला कि वो जिंदा है और पाकिस्तान की जेल में बंद है। उसके बाद से वह अपने गोद लिए भतीजे अश्विनी को लगातार पत्र भेजते रहे। अश्विनी ने 30- 35 बार किरपाल को पार्सल भी भेजे थे।
किरपाल को 1991 में पाकिस्तान के फैसलाबाद रेलवे स्टेशन पर हुए बम धमाके का आरोपी बनाया गया था। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण परिवार उनकी रिहाई की पैरवी नहीं कर सका था, तब से वह वहीं की जेल में कैद थे। 11 अप्रैल की रात अश्विनी को सीआईडी के माध्यम से सूचना मिली कि किरपाल की पाकिस्तान में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई है।
हंदवाड़ा से 22 साल बाद हटाए गए सेना के तीन बंकर
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- फोटो : Getty Images
कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा इलाके के मुख्य चौक से मंगलवार को सेना के तीन बंकरों को हटा दिया गया। पिछले कई दिनों से लगातार जारी हिंसा के बीच लोगों को शांत करने के लिए स्थानीय नगर निगम ने मुख्य बाजार में बने सेना के तीन बंकरों को तोड़ दिया है।
सेना के ये तीनों बंकर लगभग 22 साल बाद हटाए गए हैं। इन तीनों बंकरों को लगभग दो दशक पहले यहां सेना द्वारा स्थापित किया गया था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘हंदवाड़ा मुख्य बाजार में दुकानों की छत पर निर्मित तीन बंकरों को स्थानीय नगर निगम अधिकारियों ने हटा दिया है। जिसे स्थानीय लोग पिछले कई दिनों से तोड़ने की मांग कर रहे थे लेकिन सेना इन बंकरों को हटाने के लिए तैयार नहीं थी।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हंदवाड़ा शहर में सुबह आठ बजे से दोपहर 12 तक प्रतिबंधों में चार घंटे की ढील दी गई है। यदि हालात शांतिपूर्ण रहते हैं तो इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिंसा प्रभावित क्षेत्र में अभी तक हालात शांतिपूर्ण हैं।
सेना का बंकर हटाए जाने के बाद कुछ स्थानीय युवाओं ने इस चौक का नाम भी बदल दिया। चौक की रेलिंग पर शहीद नईम चौक के नाम का बैनर लगा दिया गया है।
कश्मीर में वाजपेयी के सपने को साकार करेगी सरकारः मोदी
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- फोटो : Amar Ujala
एक दिवसीय दौरे पर कटड़ा पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ककरयाल गांव में श्री माता वैष्णो देवी तीर्थस्थल बोर्ड की ओर से 300 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अस्पताल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होनें एक जनसभा को भी संबोधित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य के लोगों को इस नए सुपर स्पेशलियटी अस्पताल की बधाई देते हुए कहा कि, चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हर तरफ एक संतुलित विकास और तेज गति से विकास करने की जरूरत है।
भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास और शांति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमें वाजपेयी जी के सपने इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत को आगे लेकर जाना है और उसमें सबका साथ-सबका विकास का रंग भरना है।
पीएम ने राज्य के विकास पर जोर देते हुए कहा कि, जम्मू कश्मीर की सारी समस्याओं का एक समाधान है, वह है विकास, और सिर्फ विकास। उन्होनें भाजपा औप पीडीपी गठबंधन के मिलकर काम करने और राज्य के विकास को नई उंचाईयों तक पहुंचाने की बात को दोहराया।
इससे पूर्व उन्होंने माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्र छात्राओं को डिग्री भी बांटी।
मौत से कुछ दिनों पहले ही कराया गया था प्रत्यूषा का गर्भपात
टीवी धारावाहिक बालिका वधू में आनंदी के रोल से घर-घर में मशहूर हुईं प्रत्यूषा बनर्जी की मौत के बाद अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में प्रत्यूषा के गर्भवती होने की बात सामने आई है, पुलिस के अनुसार मौत से कुछ दिन पहले उसका गर्भपात भी कराया गया था।
दरअसल प्रत्यूषा की मौत के बाद उसके शव को देखने वाले कुछ डॉक्टरों ने इस बात का शक जाहिर किया था कि प्रत्यूषा मौत के वक्त गर्भवती थी। डॉक्टरों के इस बात को उठाने के बाद जांच के लिए नमूने भेजे गए थे।
जो नमूने प्रत्यूषा की गर्भवती होने की जांच के लिए भेजे गए थे, उनसे ये बात साफ हुई है कि प्रत्यूषा की कोख में बच्चा पल रहा था। साथ ही ये भी बताया जा रहा है कि उसकी आत्महत्या से कुछ ही दिन पहले उसका गर्भपात कराया गया था।
इससे इस बात को लेकर ये सवाल उठ रहा है कि कहीं अपने बच्चे को खो देने के दर्द ने ही तो प्रत्यूषा को ये कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं कर दिया। प्रत्यूषा के गर्भपात कराने का शक राहुल राज पर ही है।
काबुल में भारतीय दूतावास के बाहर धमाका, 24 की मौत
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अमेरिकी दूतावास के करीबी आत्मघाती बम धमाका हुआ है। अफगानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता सेदिक सिद्दकी के मुताबिक हमलावर ने दूतावास के करीब एक वाहन को उड़ा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इलाका धूएं और धूल के गुबार से भर गया है। माना जा रहा है कि हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं। समाचार एजेंसी रायटर्स ने अफगानी राष्ट्रपति अशरफ घानी के हवाले से बताया कि धमाके में कई लोग मारे गए हैं और कई लोग घायल हुए हैं।
हमले में सरकारी दफ्तरों और सुरक्षा एजेंसियों को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है।