विनोद अग्निहोत्री: कोई चीज गड़बड़ है और हम बोलें कि व्यवस्था गड़बड़ है। तो जनरलाइज हो जाता है। व्यवस्था में पूरा देश आ गया। भारत के साथ समस्या यही है। भगदड़ हो जाए, लोग मर जाएं, व्यवस्था जिम्मेदार है। अस्पताल में आग लग जाए, लोग मर जाएं। व्यवस्था जिम्मेदार है। मतलब लोगों की जान सस्ती हो गई गई है। मुझे लगता है समाज भी इम्यून हो गया है। बिल्कुल उसमें कोई प्रतिक्रिया ही नहीं होती। कोई रिएक्शन ही नहीं होता। इसी देश में प्याज के दाम बढ़ने पर सरकारें बदली हैं। इसी देश में नसबंदी ने इंदिरा गांधी की सरकार को गिरा दिया था। ये तो इतनी ज्यादा हृदय विदारक बात है। छोटे बच्चों के मां-बाप सरकारी अस्पताल जा रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टर दवा प्रिस्क्राइब करके दे रहे हैं। वह दवाई प्रिस्क्राइब कर रहे हैं जो सरकार द्वारा स्वीकृत है। इन दवाओं की लेबोरटरीज में टेस्टिंग होती है। टेस्टिंग के बाद उनको सर्टिफिकेट मिलता है। ड्रग कंट्रोलर्स उसको देते हैं। उसके बाद वो दवाई डॉक्टर लिखते हैं और उसके बाद मौत हो जाती है। तब सिस्टम जागता है। फिर वो पता लगता है कि अरे इसमें तो यह मिला हुआ है। इसमें तो वो मिला हुआ है। ये तो गड़बड़ है। वो गड़बड़ है। हेल्थ को लेकर के हमारे देश में सबसे बड़ी समस्या यह है कि जो सबसे बुनियादी बातें हैं उन्हीं में सबसे ज्यादा घोटाले होते हैं।