परमबीर सिंह ने अपने पत्र में 100 करोड़ रुपये की वसूली का टार्गेट तय करने के मामले में पूरी तरह से एनसीपी को ही निशाना बनाया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि अनिल देशमुख के इस भ्रष्टाचार के संबंध में शरद पवार और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को भी अवगत कराया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
परमबीर सिंह के तबादले के बाद शिवसेना ने खुलकर उनका बचाव किया है। पार्टी के मुखपत्र में दावा किया गया कि परमबीर सिंह दिल्ली की खास लॉबी के शिकार हुए, लेकिन अब सिंह के पत्र के बाद राजनीतिक परिस्थिति पूरी तरह से बदली हुई नजर आ रही है। इसके बाद शिवसेना और एनसीपी के बीच दोषारोपण की शुरूआत भी हो गई है। इससे दोनो दलों के बीच दूरी बढ़ेगी जिसका पूरा फायदा भाजपा उठाएगी।
गृहमंत्री अनिल देशमुख पर पूर्व पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह द्वारा गंभीर आरोप लगाने के बाद अब इस मामले में केंद्रीय जांच एजेसियों की इंट्री हो सकती है। सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे गए पत्र की प्रति राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी भेजी है।
वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की है। फडणवीस की इस मांग से समझा जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की जांच में शामिल हो सकता है।