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साइबर क्राइम: 'निजी दुश्मनी', 'नेताजी की इज्जत' से लेकर 'यौन शोषण' तक, पढ़िए बदलता ट्रेंड

Tue, 21 Sep 2021 06:44 PM IST
Amit Mandal जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 

सार

साल 2020 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, देश में साइबर क्राइम के 50035 मामले दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि लोगों ने किस मकसद को पूरा करने के लिए साइबर अपराध का सहारा लिया।
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साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साइबर क्राइम का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसमें कई नए अपराध शामिल हो रहे हैं। अब यह शब्द केवल बैंकिंग या दूसरी वित्तीय संस्थाओं के लिए इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि इसमें 'निजी दुश्मनी' 'नेताजी की इज्जत' उछालना और 'यौन शेषण' से लेकर खुद का कारोबार जमाना, ये सब शामिल हो गए हैं। अगर किसी व्यक्ति को अपना गुस्सा ठंडा करना है तो वह भी साइबर अपराध के रास्ते पर पहुंच जाता है।

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एनसीआरबी रिपोर्ट 2020 बताती है कि सामान्य तौर पर शरारत करने और वसूली करने के लिए भी लोग 'साइबर अपराध' की दुनिया में कदम रख देते हैं। पिछले साल 1470 लोग व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के चक्कर में साइबर अपराध का शिकार हो गए। 3293 लोगों ने साइबर अपराध के जरिए यौन शोषण करना शुरू कर दिया। देश में 365 मामले ऐसे भी आए हैं, जिनमें राजनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए 'साइबर अपराध' को अंजाम दिया गया। 

साल 2020 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, देश में साइबर क्राइम के 50035 मामले दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि लोगों ने किस मकसद को पूरा करने के लिए साइबर अपराध का सहारा लिया। अगर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की बात करें तो 1470 मामले ऐसे थे, जिनमें लोगों ने अपनी खुन्नस यानी व्यक्ति रंजिश, शत्रुता या दुश्मनी निकालने के लिए साइबर अपराध कर दिया। असम में ऐसे 654 सबसे ज्यादा मामले देखने को मिले। उसके बाद कर्नाटक में 147, बिहार में 84, केरल में 44, महाराष्ट्र में 36, तमिलनाडु में 83, तेलंगाना में 96, यूपी में 78 और पश्चिम बंगाल में 66 मामले व्यक्तिगत बदला लेने के चक्कर में दर्ज किए गए थे। बता दें कि पिछले साल साइबर क्राइम के सभी तरह के मामलों में यूपी पहले नंबर पर है। वहां 11097 केस दर्ज किए गए थे। इसके बाद कर्नाटक में 10741, असम में 3530, महाराष्ट्र में 5496 और तेलंगाना में 5024 मामले दर्ज किए गए हैं। 
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गत वर्ष यौन शोषण के 3293 केस दर्ज किए गए हैं। अधिकांश मामलों में ब्लेकमेलिंग के जरिए यौन शोषण करने की बात सामने आई। महाराष्ट्र में ऐसे सबसे अधिक केस दर्ज किए गए थे। वहां 612 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यूपी में 560, असम में 483, ओडिशा में 239 और तमिलनाडु में 192 लोगों पर यौन शोषण करने के आरोप लगे थे। उन सभी के खिलाफ साइबर अपराध का मामला दर्ज किया गया था। गुस्सा शांत करने के चक्कर में 822 लोग साइबर अपराध कर बैठे। 30142 लोगों ने फ्रॉड के चलते साइबर अपराध को अंजाम दिया। 2440 लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने साइबर अपराध के माध्यम से वसूली करनी शुरू कर दी। 254 लोगों ने महज शरारत करने के लिए साइबर अपराध का सहारा लिया। 

राजनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए भी साइबर अपराध होता है। देश में इस तरह के 356 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें नेता की इज्जत उछाल कर उसे नुकसान पहुंचाना शामिल है। तमिलनाडु में 108 केस दर्ज किए गए थे। राजनीतिक फायदा लेने के चक्कर में यूपी में 73 लोग यह अपराध कर बैठे। आंध्रप्रदेश में 67, असम में 24 और कर्नाटक में 18 लोगों ने राजनीतिक मकसद के चलते साइबर अपराध कर दिया। देश के खिलाफ नफरत फैलाने के चलते साइबर क्राइम के 165 मामले दर्ज किए गए। इनमें यूपी में 82 और असम में 58 केस शामिल हैं। 210 व्यक्ति ऐसे थे, जिन्होंने अपना कारोबार खड़ा करने के लिए साइबर अपराध की मदद ली। आतंकी गतिविधियों के लिए 113 केस दर्ज हुए थे। इनमें यूपी के 96 मामले शामिल हैं। जानकारी चुराने के 62 और अन्य मामलों में 8814 केस साइबर अपराध के तहत दर्ज किए गए हैं। जन सेवा बाधित करने के लिए लोगों ने साइबर अपराध का रास्ता अख्तियार किया। कुल 92 मामलों से 52 केस यूपी में और 12 मामले असम में दर्ज किए गए थे। 

केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों की शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल शुरु किया है। यह पोर्टल साइबर अपराध की शिकायतों की ऑनलाइन रिपोर्ट करने के लिए पीड़ितों / शिकायतकर्ताओं को सुविधा प्रदान करता है। इस पोर्टल पर केवल साइबर अपराधों से संबंधित शिकायतों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई होती है। पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायतों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों / पुलिस द्वारा शिकायतों में उपलब्ध सूचना के आधार पर निपटाया जाता है। त्वरित कार्रवाई के लिए शिकायत दर्ज करते समय सही और सटीक विवरण प्रदान करना अनिवार्य है।

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