अदालत पर भी हमला
भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने दीपावली पर प्रदूषण को केन्द्र में रखकर दिल्ली में पटाखे जलाने पर रोक लगा दी थी। राजनीति के एक खास वर्ग ने इसे धर्म से जोड़ लिया था और सोशल मीडिया पर मी लार्ड पर पर काफी कमेंट आए। बाद में लोगों ने दीपीवली के त्यौहार को मनाने के लिए दो साल पहले सोशल मीडिया पर मी..लार्ड के बयान की धज्जियां उड़ा दी। कुछ समय बीता उच्चतम न्यायालय के चार जज अंदर का झगड़ा सार्वजनिक तौर पर ले आए। सोशल मीडिया उच्चतम न्यायालय के जजों पर मर्यादा के पार जाकर टिप्पणी से भर गया। कुछ समय और बीता जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायर हुए। जस्टिस रंजन गगोई ने कार्यभार संभाला। सोशल मीडिया ने जानकारी दी कि कांग्रेसी का बेटा देश का प्रधान न्यायाधीश बन गया। सीबीआई का झगड़ा शीर्ष अदालत में पहुंचा तो मानों सोशल मीडिया को पहले ही फैसले की जानकारी हो गई हो। जस्टिस सीकरी प्रधान न्यायाधीश द्वारा सीबीआई की चयन समिति की बैठक के लिए नॉमित किए गए तो सोशल मीडिया ने चयन समिति की बैठक का निर्णय आने के बाद तक अपना फैसला सुनाना बंद नहीं किया। राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर संघ से लेकर सबने उच्चतम न्यायालय को उसकी मर्यादा ही बता दी। अब जस्टिस एके सीकरी खुद सामने आए हैं। उन्होंने भी कहा कि इस तरह के प्रयासों से जजों पर भी उनके कामकाज में असर पड़ता है। सबकुछ बस एक चुनाव, एक सत्ता के लिए हो रहा है।
आखिर क्यों बिगड़ रही है भाषा, मर्यादा?
राजनीति के मर्मज्ञ रहे रजनी कोठारी कहा करते थे कि सत्ता में बड़ा आकर्षण होता है। यह जितना सुख लेकर आती है, उतना ही राजनीतिक जमीन के कमजोर होने का एहसास करने पर छलनी करती जाती है। कोठारी ने एक साक्षात्कार में बताया कि था जिसके पास सत्ता होती है, वह अपनी कमजोरी छिपाने के लिए विपक्ष पर हमलावर होने में मर्यादा भूल सकता है। ऐसा ही विपक्ष के साथ होता है। विपक्ष जवाब में उतना ही धारदार होता जाता है। इतना ही नहीं जिसके पास सत्ता होती है, उसके विरुद्ध विपक्ष में मौजूद दल भी सत्ता में हिस्सेदारी और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए एकजुट होते चले जाते हैं। कोठारी के अनुसार यह राजनीति में ही होता है।
कहीं सरकार बदलने का संकेत तो नहीं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का लोकसभा में जवाब देते हुए सात फरवरी को इसका संकेत दिया। पहली बार प्रधानमंत्री ने अगली सरकार के गठबंधन वाली सरकार होने की खुलकर संभावना जताई। भाजपा ने अबकी बार फिर मोदी सरकार का नारा दिया है, लेकिन प्रधानमंत्री सदन को बताया कि 30 साल बाद देश की जनता ने उनके नेतृत्व को पूर्ण बहुमत दिया। 2014 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन 30 सालों में देश में मिलावट वाली सरकार सत्ता में आई और अब महामिलावट वाली आने वाली है। प्रधानमंत्री ने हालांकि बाद में अपने भाषण में इसमें काफी सुधार किया, लेकिन राजनीतिक गलियारे में इसे कहीं न कहीं सत्ता पक्ष का डोल रहा आत्म विश्वास तो विपक्ष के लिए सत्ता मिलने का सपने देखने के तौर पर देखा जा रहा है।