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सियासत का खेल: देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों को ये कैसी-कैसी धमकियां मिल रही हैं

Mon, 11 Feb 2019 08:43 PM IST
अमित मंडल जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीबीआई
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लोकसभा चुनाव निकट आ रहा है, विपक्षी नेताओं पर जांच एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इन सबके बीच देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों को मिलने वाली धमकियां भी दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं। आए दिन कोई न कोई विपक्षी दल सीबीआई को देख लेने का बयान जारी कर देता है। कभी ईडी को डराने का प्रयास होता है।

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धमकियों के इस सिलसिले से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) भी नहीं बच सके। सीएजी को भी यह धमकी भरा संदेश दे दिया गया है कि उन्हें पता होना चाहिए, सरकारें आती-जाती रहती हैं। मोदी से वफादारी दिखाने वाले अफसर विपक्ष की रडार पर हैं, अंत में विपक्षी नेता यह चेतावनी देना नहीं भूलते।

सीबीआई-ईडी को कौन कैसे डरा रहा है, जानिये...  

सबसे पहले बात करतें हैं सीबीआई की।यही सबसे ज्यादा चर्चा में है। सर्वोच्च अदालत से लेकर तमाम विपक्षी दल इसे 'तोता' करार दे चुके हैं। जब कभी विपक्षी नेता के घर पर रेड पड़ती है तो सबसे पहले इस एजेंसी को धमकियां मिलनी शुरू हो जाती हैं। अब तो बात  गिरफ़्तारी तक पहुंच गई है।
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कोलकाता में तो पुलिस ने सीबीआई को ही गिरफ़्तार कर एक नया कारनामा कर दिया। कई राज्यों ने अपने यहां इसकी जांच प्रक्रिया को ही बाधित कर दिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसे 'मोदी सीबीआई' का नाम दे चुके हैं। कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा ने सीबीआई के अफसरों को चेतावनी दे डाली थी कि वे सरकार के इशारे पर गैर-कानूनी तरीके से विपक्षी नेताओं के पीछे न लगें। ऐसे अफसर समझ लें कि इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।ईडी द्वारा रॉबर्ट वाड्रा को बार-बार पूछताछ के लिए बुलाना, इस पर कांग्रेस नेता राज बब्बर ने कहा कि ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाएं अपना विश्वास खो चुकी हैं। जो 'तोते' का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि यह 'तोता' उनके खिलाफ भी इस्तेमाल हो सकता है।

मायावती, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, चंद्रबाबू नायडू और दूसरे विपक्षी नेता भी धमकी भरे लहजे में अधिकारियों को बता चुके हैं कि वे कानूनी दायरे में काम करें, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। रणदीप सुरजेवाला ने कहा, भाजपा सीबीआई, ईडी और डीआरआई का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है। ऐसे में जांच एजेंसी के अफसर कानून के दायरे में रह कर और अपने विवेक से काम करें।किसी के दबाव आकर कुछ करेंगे तो कल उन्हें जवाब भी देना होगा।
 

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सीवीसी जैसी टॉप संस्था भी विपक्षी दलों के निशाने पर 

सीबीआई प्रकरण में सीवीसी पर भी जमकर हमले हुए।कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, सीवीसी दोहरे चरित्र का निर्वहन कर रहा है।वह मोदी सरकार के इशारे पर काम कर संवैधानिक व्यवस्थाओं को तोड़ रही है। सीवीसी जैसी सर्वोच्च संस्था पीएमओ के दबाव में पूर्व सीबीआई निदेशक के घर तक पहुंच जाते हैं। इससे पहले पवन खेड़ा ने कहा था, सीवीसी खुद कई तरह के आरोपों में घिरे हैं।

धमकियों की इस सीरिज में अब सीएजी का नंबर भी आ गया 

कांग्रेस ने रविवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) राजीव महर्षि से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के करार की ऑडिट प्रक्रिया से खुद को अलग करने की मांग की। कपिल सिब्बल बोले, जो भी अधिकारी पीएम नरेंद्र मोदी से वफादारी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को पता होना चाहिए कि सरकारें आती-जाती रहती हैं। कभी हम सत्ता में होते हैं, तो कभी विपक्ष में। सिब्बल ने सीएजी राजीव महर्षि पर आरोप लगाया कि जब राफेल डील हो रही थी उस वक्त वह वित्त सचिव थे, ऐसे में वह एनडीए सरकार को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
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