इस प्रक्रिया में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली सूर्य की रोशनी का ऊर्जा के रूप में उपयोग होता है। इसके जरिए पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को अलग किया जाता है। यह प्रक्रिया पेड़-पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया जैसी है, वे भी पानी से हाइड्रोजन व ऑक्सीजन अलग कर कार्बन से प्रतिक्रिया करवा के कार्बोहाइड्रेट्स बनाते हैं।
आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया से उच्च शुद्धता वाली हाइड्रोजन बनाने प्रक्रिया विकसित की है। यह प्रक्रिया साधारण और कम लागत पर शुद्ध हाइड्रोजन हासिल में में उपयोगी बताई गई है। इसका उपयोग हाइड्रोजन वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग हो सकेगा। इससे इन वाहनों को पेट्रोल-डीजल के वाहनों का बेहतर विकल्प बनाने और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी।
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संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर राकेश के शर्मा ने बताया कि पेटेंट करवाई गई इस प्रक्रिया में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली सूर्य की रोशनी का ऊर्जा के रूप में उपयोग होता है। इसके जरिए पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को अलग किया जाता है। यह प्रक्रिया पेड़-पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया जैसी है, वे भी पानी से हाइड्रोजन व ऑक्सीजन अलग कर कार्बन से प्रतिक्रिया करवा के कार्बोहाइड्रेट्स बनाते हैं। इसी लिए संस्थान द्वारा विकसित प्रक्रिया को कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण कहा जा रहा है।
कई फायदे बताए
वैज्ञानिकों का लक्ष्य इस प्रक्रिया से हाइड्रोजन का बड़े स्तर पर उत्पादन है। इसे ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और उद्योग आदि क्षेत्रों को मुहैया कराया जा सकेगा। खासतौर से सीधे हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले वाहनों में इसे उपयोग किया जा सकेगा।
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सौर उर्जा व रीसाइकिल कैटालिस्ट के कारण लागत कम
इस प्रक्रिया में रीसाइकिल किए जाने वाले कैटालिस्ट उपयोग होते हैं, इसलिए भी इसका खर्च कम है। वहीं सूर्य की रोशनी के अलावा किसी अन्य ऊर्जा के स्रोत की जरूरत न होने से भी लागत कम होती है। सही कैटालिस्ट की तलाश के लिए वैज्ञानिकों ने 100 से ज्यादा कॉम्बिनेशन परखे।
आईआईटी मद्रास में विद्यार्थियों ने बनाई पहली इलेक्ट्रिक फॉर्मूला रेसिंग कार
आईआईटी मद्रास के छात्रों ने अपने संस्थान की पहली इलेक्ट्रिक फॉर्मूला रेसिंग कार आरएफ23 बनाई है। इसे सोमवार को लॉन्च किया गया। संस्थान की 45 विद्यार्थियों के रफ्तार ग्रुप ने इस पर एक वर्ष इसके डिजाइन, निर्माण और गहन परीक्षण पर काम किया।
विद्यार्थियों का दावा है कि यह कम्बशन मॉडल के मुकाबले ज्यादा तेज भी है क्योंकि इलेक्ट्रिक होने से इसे ज्यादा शक्ति देना संभव हुआ है। अब वे आरएफ23 के जरिए भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। इसे फॉर्मूला स्टूडेंट प्रतियोगिताओं में उतारना चाहेंगे, जहां विश्व के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों से प्रतियोगिता होती है। संस्थान के निदेशक प्रो. वी कामकोटी ने बताया कि इस समय वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों का विकास शुरुआती चरण में है, लेकिन इसमें तकनीकी आधुनिकीकरण की असीम संभावनाएं हैं।