संसद का मानसून सत्र में दोनों सदनों के स्थगित होने के 40 दिन बाद भी औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है, जिससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि सरकार नया सत्र बुलाए बिना ही एक अहम कानून लाना चाहती है। वहीं, लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी अचारी ने पीटीआई को बताया कि दोनों सदनों का 40 दिनों तक स्थगित रहना एक नया रिकॉर्ड है।
क्या महिला आरक्षण कानून लाने की तैयारी में है सरकार?
उन्होंने याद दिलाया कि 2015 में संसद के दोनों सदनों को 28 दिनों के बाद स्थगित कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय सरकार जीएसटी कानून पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही थी। वहीं, इस बात के मजबूत संकेत हैं कि सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए उसमें संशोधन का प्रस्ताव फिर से लाने की योजना बना रही है।
बजट सत्र में क्यों पेश नहीं हो पाया?
इससे पहले बजट सत्र के दौरान कोशिश की गई थी, लेकिन पर्याप्त संख्या बल न होने के कारण सफल नहीं हो पाई थी। खास रूप से दक्षिणी विपक्षी दलों की चिंताओं को दूर करने के लिए, जो जनसंख्या आधारित परिसीमन के तहत लोकसभा प्रतिनिधित्व में गिरावट की आशंका जता रहे हैं। सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों में 50 प्रतिशत की एक समान वृद्धि का प्रस्ताव करती है।
कब से स्थगित है सदन?
लोकसभा और राज्यसभा, दोनों की कार्यवाही 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई थी। आम तौर पर, अगले तीन से चार दिनों के भीतर सत्र का सत्रावसान (औपचारिक समापन) कर दिया जाता है। लेकिन इस बार, मंगलवार सुबह तक सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
बजट सत्र 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था। वहीं, 20 अप्रैल को उसका सत्रावसान किया गया था। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रपति सरकार की सिफारिश पर सत्र बुलाते हैं। उसका सत्रावसान करते हैं।इसके साथ ही शीतकालीन सत्र आम तौर पर नवंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू होता है। क्रिसमस से पहले समाप्त हो जाता है।