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New Parliament: सावरकर की जयंती के दिन नए संसद भवन का उद्घाटन; सियासी जंग के बीच यह महज संयोग या रणनीति?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 19 May 2023 03:54 PM IST

सार

साल 2019 में जब राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर टिप्पणी की थी तो भाजपा ने राहुल से माफी की मांग की थी। हालांकि, राहुल गांधी ने तब भी यह कहकर माफी मांगने से इनकार कर दिया था कि 'मेरा नाम राहुल गांधी है, राहुल सावरकर नहीं।'
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नया संसद भवन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI


राजनीतिक विश्लेषक संजय मिश्र से हमने इस मसले पर बात की। उन्होंने कहा, 'राजनीति में बिना रणनीति के कुछ भी नहीं होता है। वीर सावरकर देश के नायक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमाम अड़चनों के बावजूद कम समय में देश को ये कर दिखाया है।' उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र का मंदिर संसद होता है। अभी जो संसद की इमारत है उसे अंग्रेजों ने बनवाया था। अब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम कुछ नया करने जा रहे हैं। नया संसद भवन मजबूत लोकतंत्र का प्रतीक होगा। मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया का नारा देकर प्रधानमंत्री ने ये साफ कर दिया है कि भारत को किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है। भारत विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनता हुआ दिख रहा है।' तो आइए इसके पीछे के तर्क को समझने की कोशिश करते हैं....


सबसे पहले जानते हैं कि सावरकर की चर्चा क्यों...

संसद का पिछला सत्र सत्ता और विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया था। कांग्रेस समेत कई दल अदाणी मामले में जेपीसी की मांग कर रहे थे तो सरकार विदेश में राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर माफी की मांग कर रही थी। इस बीच राहुल गांधी को जब मानहानि के मामले में सजा सुनाई गई, तो उन्होंने यह कहकर माफी मांगने से इनकार कर दिया था कि 'वह गांधी हैं, सावरकर नहीं।' साल 2019 में जब राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर टिप्पणी की थी तो भाजपा ने राहुल से माफी की मांग की थी। हालांकि, राहुल गांधी ने तब भी यह कहकर माफी मांगने से इनकार कर दिया था कि 'मेरा नाम राहुल गांधी है, राहुल सावरकर नहीं।' राहुल गांधी पहले भी सावरकर और आरएसएस पर सवाल उठा चुके हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सावरकर ने अंग्रेजों की मदद की थी। 


ऐसे में 28 मई की तारीख एक संयोग या रणनीति?

भाजपा लगातार विनायक दामोदर सावरकर को अपने आइकन के रूप में पेश करती आई है। इसकी वजह ये है कि भाजपा राष्ट्रवाद के साथ हिंदुत्व को साथ लेकर राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। ऐसे में सावरकर भाजपा के लिए सबसे मुफीद साबित होते हैं। भाजपा के कुछ नेता तो सावरकर को भारत रत्न देने की भी मांग भी कर चुके हैं। माना जा रहा है कि सावरकर जयंती पर नए संसद भवन का उद्घाटन करके भी भाजपा, सावरकर को विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है। इसे राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए करारे जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है।


कहीं महाराष्ट्र निकाय चुनाव पर नजर तो नहीं?

महाराष्ट्र की राजनीति में विनायक दामोदर सावरकर एक बड़ा नाम हैं। यही वजह है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना, कांग्रेस के साथ गठबंधन के बावजूद वीडी सावरकर को लेकर कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है। महाराष्ट्र में जल्द ही निकाय चुनाव होने हैं। बीते दिनों जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की मौजूदा एकनाथ शिंदे सरकार पर सवाल खड़े किए, उससे राज्य में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के लिए सहानुभूति पैदा हो सकती है। ऐसे में हो सकता है कि भाजपा वीडी सावरकर के सहारे अभी से ही राज्य की राजनीति को साधने में जुट गई हो। 


तारीख चुनने के मामले में भाजपा का रिकॉर्ड

- भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री के पिछले अहम फैसलों पर गौर करें तो पाएंगे कि वे कोई भी तारीख बहुत सोच-समझकर तय करते हैं। जैसे पांच अगस्त 2019 को केंद्र की भाजपा सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया था। इसके एक साल बाद पांच अगस्त 2020 को ही प्रधानमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी थी। 

- इसके अलावा सात साल पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक से पाकिस्तान पहुंचकर सभी को चौंका दिया था। पीएम मोदी 25 दिसंबर को पाकिस्तान पहुंचे थे। इस दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ का जन्मदिन था। वे अटल बिहारी वाजपेयी ही थे, जिन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत की पहल की थी और ऐतिहासिक लाहौर बस यात्रा लेकर पाकिस्तान के लाहौर पहुंचे थे। 
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- 26 मई 2023 को केंद्र की मोदी सरकार के नौ साल पूरे हो रहे हैं। ऐसे में 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन के जरिए पीएम मोदी अपनी सरकार के कामों को देश के सामने रखना चाहेंगे और इसके लिए लोकतंत्र के मंदिर से बड़ी कोई और जगह नहीं हो सकती।  


अब नए संसद भवनके बारे में भी जान लीजिए...

नए संसद भवन का निर्माण ढाई साल से भी कम समय में हुआ है। 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के नए भवन का शिलान्यास किया था। नए संसद भवन में लोकसभा के 888 सदस्यों और राज्यसभा के 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था की गई है। मौजूदा संसद भवन में लोकसभा के 550 और राज्यसभा में 250 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। नए संसद भवन में एक भव्य संविधान कक्ष, सांसदों के बैठने के लिए लाउंज, लाइब्रेरी, कई समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

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