बैठक के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि जलियांवाला बाग भारत की एकता और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक है। इस पवित्र स्थान के रख-रखाव और प्रबंधन की जि़म्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काम करने वाले एक ट्रस्ट द्वारा निभाई जाती है। ट्रस्ट के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। नए सदस्यों की नियुक्ति न होने के कारण ट्रस्ट की बैठक नहीं हो पा रही है।
नतीजतन, शताब्दी समारोह की अग्रिम तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। सिद्धू के मुताबिक ट्रस्ट की बैठक न होने के कारण कई अहम प्रस्तावों को अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। नए सदस्यों की नियुक्ति के बाद ही यह ट्रस्ट अपना काम-काज कर सकेगा। उन्होंने कहा कि हमने जलियांवाला बाग का स्मृति समारोह बड़े पैमाने पर मनाने के लिए 20 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार के पास भेजे हुए हैं।
सांस्कृतिक मामलों के केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने सिद्धू को भरोसा दिया है कि नए तीन सदस्यों की नियुक्ति एक हफ्ते के अंदर-अंदर कर दी जाएगी। इसके उपरांत तुरंत ट्रस्ट की मीटिंग होगी। इससे पहले सिद्धू ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे एलफौंस के साथ बैठक कर कई दूसरे प्रस्तावों पर चर्चा की।