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वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने के लिए पुलिस मौके पर बुलाएगी बीमा एजेंट को...

Fri, 05 Oct 2018 09:54 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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सांकेतिक तस्वीर
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अगर आपके वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं हुआ है तो अविलंब करा लें। देर बिल्कुल न करें। कहीं जांच के दौरान बिना इंश्योरेंस की गाड़ी पकड़ी गई तो वह तब तक नहीं छुटेगी, जब तक उसका बीमा नहीं हो जाता। आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस कराने के लिए पुलिस मौके पर ही बीमा एजेंट को बुलाएगी।

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बीमा एजेंट के आने तक आपको वहीं पर इंतजार करना होगा। यह तय है कि जब तक गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं होगा, वाहन नहीं छुटेगा। आपके लिए राहत की बात केवल इतनी सी होगी कि इंश्योरेंस ऑनलाइन कराया जाएगा। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या पेटीएम आदि से इंश्योरेंस करा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा कमेटी ने सभी राज्यों को उक्त आदेश जारी कर दिए हैं। कमेटी के सचिव एसडी बंगा का कहना है कि इस मामले में खासतौर से राज्यों की पुलिस और परिवहन प्राधिकरण को सख्त हिदायतें दी गई हैं। यदि कोई भी वाहन थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के बिना चलता हुआ पकड़ा जाता है तो उसे तब तक नहीं छोड़ा जाएगा, जब तक कि गाड़ी का बीमा नहीं हो जाता। बता दें कि इसी साल एक सितंबर से देश में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने के नए नियम लागू हुए थे।

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तीन साल के लिए होगा कार का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस

हालांकि इन नियमों की सिफारिश भी सड़क सुरक्षा कमेटी ने की थी। इनके तहत जब भी कोई नई कार या बाइक-स्कूटर आदि खरीदी जाएगी तो संबंधित डीलर मौके पर ही थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने की व्यवस्था करेगा। इसमें कार का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस तीन साल के लिए और बाइक आदि का 5 साल के लिए बीमा होगा। इसके बाद वाहन मालिक को हर साल इंश्योरेंस का नवीनीकरण कराना पड़ेगा।

ये नियम लागू होने के एक माह बाद सभी राज्य अपने अपने क्षेत्र में वाहनों की जांच पड़ताल कर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का पालन सुनिश्चित करेंगे। कमेटी के मुताबिक, देश में करीब 15 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से करीब साठ फीसदी गाड़ियां ऐसी हैं, जिनका थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं होता।

पिछले साल 146377 लोग सड़क हादसों में मारे गए थे....
परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 146377 लोग सड़क हादसों में मारे गए थे, जबकि साल 2016 में यह आंकड़ा 150935 था। 2015 में भी 146133 लोगों की सड़क हादसों में जान चली गई थी। देश में हर एक घंटे 55 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 17 लोग मारे जाते हैं। 
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