राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत आर्थिक वैश्वीकरण की रीढ़ हैं। लिहाजा, दोनों को वैश्विक शांति और विकास में सहयोग करना चाहिए। उन्हें अच्छे पड़ोसी और दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। मोदी ने कहा कि भारत-चीन सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर जिनपिंग से बातचीत हुई। हमने आर्थिक संबंधों को गति देने के साथ ही दोनों देशों के व्यक्ति से व्यक्ति संबंधों पर चर्चा की। विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं ने भारत-चीन सीमा के सभी क्षेत्रों में शांति और सद्भाव बरकरार रखने पर जोर दिया। दोनों के बीच अफगानिस्तान में संयुक्त आर्थिक परियोजना शुरू करने पर सहमति बन गई है। अब दोनों पक्षों के अधिकारी अगले दौर की बातचीत में तय करेंगे कि यह परियोजना अफगानिस्तान में किस जगह और कैसी होगी।
गोखले ने बताया, ‘मोदी-जिनपिंग ने सीमा विवाद प्रबंधन को प्रभावी बनाने और सीमा क्षेत्रों में अप्रिय हालात से बचने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए।’ दोनों शीर्ष नेताओं ने विश्वास बहाली के लिए अपनी सेनाओं को साझा व बराबरी की सुरक्षा का सिद्घांत, सीमा क्षेत्रों में टकराव टालने के लिए मौजूदा संस्थागत तंत्र व सूचनाएं साझा करने के तंत्र को मजबूत करने जैसे मानकों को लागू करने के निर्देश दिए।
सीमा विवाद निपटाने वाले प्रतिनिधियों के काम की सराहना
अनौपचारिक बातचीत में मोदी-जिनपिंग ने सीमा विवाद से निपटने के लिए न्यायपूर्ण, तर्कसंगत और स्वीकार्य समाधान खोजने वाले विशेष प्रतिनिधियों के अब तक के काम की तारीफ की। अब तक भारत-चीन के बीच सीमा विवादों को निपटाने के लिए 20 दौर की बातचीत हो चुकी है। गोखले ने बताया, ‘शीर्ष नेताओं का मानना है कि दोनों देश बातचीत के जरिये अपने मतभेद सुलझाने में सक्षम हैं। साथ ही दोनों देश एक-दूसरे की संवेदनाओं, चिंताओं और महत्वाकांक्षाओं का सम्मान करेंगे।’
गोखले के मुताबिक, मोदी-जिनपिंग ने माना कि दोनों देशों के क्षेत्रीय व वैश्विक हित एक-दूसरे से जुड़े हैं। मजबूत रणनीतिक संवाद से संबंध मजबूत होंगे और दोनों देश क्षेत्रीय व वैश्विक स्थायित्व में सहयोग कर पाएंगे। दोनों पक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्घता जताई। हालांकि, दोनों ओर से जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर सीधे कोई बात नहीं हुई। गौरतलब है कि चीन संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने पर बार-बार अड़ंगा डाल रहा है।
कारोबार संतुलन पर रहा मोदी का जोर
मोदी-जिनपिंग ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि दोनों देशों के बीच संतुलित और दीर्घकालिक कारोबार होना चाहिए। इस दौरान मोदी ने कारोबार में संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने जिनपिंग को भारत से चीन को कृषि उत्पादों व दवाइयों के निर्यात की संभावनाओं के बारे में बताया। दोनों के बीच पर्यावरणीय बदलावों, दीर्घकालिक विकास और खाद्य सुरक्षा पर भी बात हुई।