नकदी अर्थव्यवस्था वाला भारत अब स्मार्टफोन से भुगतान करने वाला देश बन गया है। प्रणाली में नकदी घटना बैंकों के लिए फायदेमंद है। आंकड़ों के मुताबिक, स्मार्टफोन के जरिये 2021-22 के दौरान कुल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 16 फीसदी, आईएमपीएस की 12 फीसदी और ई-वॉलेट की एक फीसदी रही।
20 साल में पहली बार दिवाली वाले सप्ताह के दौरान प्रणाली में नकदी (सीआईसी) में कमी आई है। इस दौरान सीआईसी में 7,600 करोड़ की गिरावट आई है। प्रणाली में चल रही मुद्रा में बैंक नोट व सिक्के आते हैं। इससे पहले 2009 में दिवाली वाले सप्ताह में प्रणाली में नकदी में 950 करोड़ की गिरावट हुई थी।
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एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों के बीच डिजिटल भुगतान के लोकप्रिय होने से ऐसा हुआ। नकदी अर्थव्यवस्था वाला भारत अब स्मार्टफोन से भुगतान करने वाला देश बन गया है। प्रणाली में नकदी घटना बैंकों के लिए फायदेमंद है। आंकड़ों के मुताबिक, स्मार्टफोन के जरिये 2021-22 के दौरान कुल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 16 फीसदी, आईएमपीएस की 12 फीसदी और ई-वॉलेट की एक फीसदी रही।
6 साल में नकदी का चलन 88 प्रतिशत से घटकर 20 फीसदी
रिपोर्ट के मुताबिक, नकदी का चलन 2016 में 88 फीसदी था, जो 2022 में घटकर 20 फीसदी रह गया। 2027 तक इसके और घटकर 11-15 फीसदी रह जाने का अनुमान है। इसके विपरीत, डिजिटल लेनदेन की हिस्सेदारी 2016 में 11.26 फीसदी थी। 2022 में बढ़कर यह 80.4 फीसदी के पार पहुंच गई है। 2027 में इसके 88 फीसदी तक जाने का अनुमान है। 2016 में कुल लेनदेन में यूपीआई का हिस्सा शून्य था। 2022 में यह बढ़कर 16.1% पहुंच गया। 2021-22 में यूपीआई से 84 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ।