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Congress: 'ऑपरेशन सिंदूर पर अपने बयान के लिए नहीं मांगूंगा माफी', शशि थरूर बोले- कभी नहीं छोड़ा पार्टी का रुख

Sat, 24 Jan 2026 01:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझिकोड (केरल)

सार

Congress: कांग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेद की अटकलों के बीच सांसद शशि थरूर ने अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि उन्होंने कभी संसद में पार्टी लाइन नहीं छोड़ी और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उनकी असहमति सैद्धांतिक थी, जिस पर वह आज भी कायम हैं। थरूर ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट-
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शशि थरूर, सांसद, कांग्रेस - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी के रुख का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैद्धांतिक रूप से उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति ऑपरेशन सिंदूर को लेकर थी। थरूर केरल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया था और वह इस अब भी बिना किसी पछतावे के इस रुख पर कायम हैं। 
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थरूर को लेकर क्या अटकलें लगाई जा रहीं?
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद चल रहे हैं। इन अटकलों में यह भी शामिल है कि कोच्चि में हुए एक हालिया कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से उन्हें पर्याप्त महत्व न दिए जाने और राज्य के नेताओं की ओर से कई बार उन्हें किनारे लगाने की कोशिशों से वे नाराज हैं।
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पहलगाम आतंकवादी हमले को लेकर थरूर ने क्या कहा?
अपने रुख को स्पष्ट करते हुए थरूर ने कहा कि एक पर्यवेक्षक और लेखक के रूप में उन्होंने पहलगाम की घटना के बाद एक अखबार में लेख लिखा था। उस लेख में उन्होंने कहा था कि बिना सजा दिए इस मामले को नहीं छोड़ा जाना चाहिए और इसके जवाब में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।



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पाकिस्तान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर क्या बोले?
  • शशि थरूर ने कहा कि भारत का मुख्य ध्यान विकास पर है और उसे पाकिस्तान के साथ लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में नहीं फंसना चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि अगर कार्रवाई हो, तो वह केवल आतंकवादी ठिकानों तक ही सीमित रहनी चाहिए।
  • थरूर के मुताबिक, उन्हें हैरानी हुई कि भारत सरकार ने वही कदम उठाए, जिनकी उन्होंने सिफारिश की थी।

'अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?'
उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने ही वह प्रसिद्ध सवाल उठाया था- अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा? थरूर ने कहा, जब भारत की प्रतिष्ठा दांव पर हो, जब भारत की सुरक्षा और दुनिया में उसकी जगह का सवाल हो, तब भारत सबसे पहले आता है।  उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब राष्ट्रीय हितों की बात हो, तो भारत को सर्वोपरि रखना चाहिए।

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