मित्तल ने बताया कि एंड्रॉयड और आईओएस आधारित स्मार्ट फोन के अलावा वेबपोर्टल पर उपलब्ध नेता एप का इस्तेमाल कर कोई भी व्यक्ति अपने इलाके के सांसद और विधायक के काम का न सिर्फ रिपोर्टकार्ड जान सकेगा बल्कि उसके काम की रेटिंग भी खुद कर सकेगा।
उन्होंने बताया कि इस एप का प्रायोगिक आधार पर हाल ही में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सफल प्रयोग किया गया था। इसमें चुनाव जीतने वाले 93 प्रतिशत उम्मीदवार नेता एप की श्रेष्ठ रेटिंग में शामिल थे।
मित्तल ने बताया कि पिछले आठ महीनों में 543 संसदीय क्षेत्र और 4120 विधानसभा क्षेत्रों में अब तक लगभग 1.5 करोड़ लोगों ने नेता एप का इस्तेमाल शुरु कर दिया है। उन्होंने अगले साल आम चुनाव से पहले यह संख्या दस करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद जतायी।
इस अवसर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने नेता एप को लोकतांत्रिक व्यवस्था में फीडबैक का बेहतर माध्यम बताते हुये कहा कि यह भारत में राजनीतिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का कारक बनेगा।
केजरीवाल ने कहा कि इससे न सिर्फ मतदाताओं को बेहतर काम करने वाले नेता का चयन करने में आसानी होगी बल्कि राजनीतिक दलों को भी अच्छे रिपोर्ट कार्ड वाले उम्मीदवार चुनने में यह एप मददगार बनेगा।
16 भाषाओं में उपलब्ध है यह एप
प्रथम का कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म होना बहुत जरूरी है, जहां मतदाता अपने राजनेताओं को रेटिंग दे सके।2019 के चुनाव से पहले दस करोड़ से ज्यादा वोटर इस एप के साथ जुड़ जाएंगे। यह एप सभी तरह के मोबाइल सिस्टम पर उपलब्ध है। खास बात है कि नेता एप 16 भाषाओं में काम करता है।
आशावादी एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से राजनीति के आँकड़े एकत्रित किए हैं। इसके अलावा एप, आईवीकार कॉल और एसएमएस के जरिए भी डाटा जुटाया गया है।यह एप राजनीतिक जवाबदेही को तय करता है।नागरिकों को राजनीति के बारे में अपनी राय देने में सक्षम बनाता है।
पांच में से जो मर्जी अंक दे दो
प्रथम का कहना है कि यह एप आम जनता को अपने सांसद और विधायक को रेटिंग देने का अवसर प्रदान करता है।इसके माध्यम से देश के किसी भी निर्चाचन क्षेत्र में वहां के मतदाताओं की संवेदनाओं को आंका जा सकता है।
इस एप के जरिए राजनीतिक दल भी अपने जनप्रतिनिधियों को लेकर अपनी राय बदल सकते हैं।वे एप पर नेताओं के बारे में जनता से आने वाले फ़ीडबैक के आधार पर चुनाव में टिकटों का वितरण कर सकते हैं।एप पर जिस नेता की परफ़ोरमेंस सबसे अच्छी है, राजनीतिक दल टिकट वितरण के दौरान उसे प्राथमिकता देंगे, यह सम्भावना बनी रहती है।