जस्टिस भट ने यह बात बच्चों की सुरक्षा के लिए समिति द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कही। यह बैठक किशोर न्याय अधिनियम और पोक्सो एक्ट के तहत यौन अपराधों की रोकथाम की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के जज व शीर्ष कोर्ट की किशोर न्याय समिति के प्रमुख जस्टिस रवींद्र भट ने कोविड-19 महामारी पीड़ित बच्चों की मदद व लगातार निगरानी पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे उपाय किए जाने चाहिए, जिनसे वे भविष्य में भी इसके प्रभावों को सामना कर सकें।
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जस्टिस भट ने यह बात बच्चों की सुरक्षा के लिए समिति द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कही। यह बैठक किशोर न्याय अधिनियम और पोक्सो एक्ट के तहत यौन अपराधों की रोकथाम की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। 18 दिसंबर को हुई इस बैठक में अनाथ, परित्यक्त, बेसहारा बच्चों की मदद व देखभाल पर खासतौर से चर्चा हुई। बैठक में ऐसे बच्चों, जिनके परिवार उनकी देखभाल करने में असमर्थ हैं और जिनकी मानसिक सेहत पर हिंसा व अन्य खतरों का असर पड़ा है उनके पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करने पर विचार हुआ।
समिति द्वारा जारी बयान के अनुसार न्यायमूर्ति भट ने कहा कि यौन शोषण के शिकार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव और कानून के उल्लंघन करने वाले बच्चों के पुनर्वास पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे बच्चों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई पूरी होने के बाद उनकी मदद करने वाले बुनियादी ढांचे के विकास की भी जरूरत है।