विदेश सचिव एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत का लक्ष्य यह देखना है कि रोहिंग्या कैसे अपने मूल स्थान पर वापस जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस संकट को लेकर निंदा करने की बजाय यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। विदेश सचिव ने यह भी कहा कि भारत संकट की गंभीरता को लेकर आवाज उठाता रहा है और इस मुद्दे पर बांग्लादेश और म्यांमार के साथ ‘उच्च स्तरीय बातचीत’ का आयोजन किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश में म्यांमार के रखाइन प्रांत से बड़ी संख्या में लोगों का पलायन स्पष्ट रूप से चिंता का मामला है। हमारा उद्देश्य यह देखना होगा कि वे लोग अपने मूल स्थान पर वापस कैसे जा सकते हैं। यह कार्य आसान नहीं है।
हमें लगता है कि इस स्थिति से निपटने के लिए व्यावहारिक उपाय अपनाए जाने चाहिए और निंदा करने के बजाय तर्क साध्य वार्तालाप पर बल देना चाहिए। कार्नेगी इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में रोहिंग्या मुद्दे पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही।