भारत में 2014 के बाद से बड़ी आपराधिक वारदातों में गिरावट दर्ज हुई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या और दंगे जैसी गंभीर वारदातें पिछले दस साल में कम हुई हैं। वहीं, 2004 से 2014 के बीच, जब यूपीए सत्ता में थी, इन मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई थी।
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2004 से 2014 के बीच बलात्कार के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी हुई। 2004 में जहां 18,233 मामले दर्ज हुए, वहीं 2014 तक यह संख्या बढ़कर 36,735 हो गई। यह लगभग दोगुनी बढ़ोतरी थी। इसी तरह दहेज हत्याओं और दंगों में भी उस दौर में बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।
कार्यकाल में स्थिति बदली
सूत्रों ने बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में स्थिति बदली है। 2023 तक बलात्कार के मामले घटकर 29,670 रह गए, जो 2014 की तुलना में 19 प्रतिशत कम है। दहेज हत्या के मामलों में भी 27 प्रतिशत की कमी आई और 2023 में यह संख्या 6,156 दर्ज की गई।
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दंगों और हत्याओं के मामले
एनसीआरबी के अनुसार यूपीए सरकार के समय दंगे भी बढ़े थे। 2004 में 59,971 दंगे दर्ज हुए थे, जबकि 2014 तक यह संख्या 66,042 तक पहुंच गई। लेकिन 2023 तक दंगे घटकर 39,260 रह गए, यानी 40 प्रतिशत की कमी आई। हत्या के मामलों में भी गिरावट देखी गई। 2014 में 33,981 मामले दर्ज थे, जो 2023 तक घटकर 27,721 रह गए।
कुल अपराध में गिरावट
आंकड़ों से पता चलता है कि 2004 से 2014 के बीच बड़े अपराधों में 22 प्रतिशत वृद्धि हुई थी और यह 1.45 लाख मामलों तक पहुंच गए थे। लेकिन मोदी सरकार में 2023 तक ये मामले 1.02 लाख रह गए, यानी कुल 29 प्रतिशत की कमी आई। यह 2004 के आंकड़ों से भी कम है।
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पुलिस सुधार और नई तकनीक
सूत्रों ने बताया कि मोदी सरकार ने अपराध रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) को दोबारा सक्रिय किया गया, जिसमें अब 17,712 थाने और 35.24 करोड़ अपराध रिकॉर्ड जुड़े हैं। इसके अलावा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 2021 से 4,846 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।