राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी को पत्र लिखा है जिनमें बताया जा रहा है कि एक नाबालिग ने पबजी खेलने से रोकने पर अपनी मां की गोली मारकर हत्या कर दी।
पत्र में आगे लिखा गया है, यह आयोग की समझ से परे है कि भारत में एक प्रतिबंधित खेल अभी भी नाबालिगों के उपयोग के लिए उपलब्ध है जिसे भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया गया है।
पत्र में अनुरोध किया गया है कि आयोग को ऐसी घटनाओं को लेकर की गई कार्रवाई के बारे में सूचित किया जाए और दस दिनों के भीतर ऐसे खेलों की सूची प्रदान की जाए जो नाबालिगों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं।
बता दें कि पिछले शनिवार की रात लखनऊ के यमुनापुरम कॉलोनी में साधना सिंह नाम की एक महिला की हत्या कर दी गई। इस मामले में आरोपी कोई और नहीं बल्कि उनका ही बेटा निकला। जिसकी चर्चा एक सप्ताह बाद भी हो रही है।
आरोपी नाबालिग के तीन करीबी दोस्त हैं। उसमें से एक ने बताया कि वह अक्सर डरावनी और जासूसी फिल्मों की बातें करता था। यूट्यूब पर वह वीवीआईपी सिक्योरिटी सर्च करता था। इस बारे में उसने कई बार बातचीत की थी।
आरोपी नाबालिग के साथ कई बार क्रिकेट खेल चुके एक किशोर ने बताया कि वह जब मिलता था तो यूट्यूब पर वीवीआईपी सिक्योरिटी सर्च करता। फिर काफी उत्साह केसाथ उन लोगों को बताता था कि अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे कड़ी होती है। फ्रांस के राष्ट्रपति का काफिला सबसे बड़ा होता है। अपने देश के प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्रियों व फिल्म स्टार की सुरक्षा के बारे में बातें करता था।
साधना की मौत के बाद अब कॉलोनी के लोगों को उनकी नौ साल की बेटी की चिंता है। लोग उसके पालन-पोषण के बारे में चर्चा कर रहे हैं। हर कोई यही कह रहा है कि इतनी छोटी उम्र में मां का साया सिर से उठ गया। इकलौते भाई ने जिंदगी भर न मिटने वाला कलंक अपनेनाम कर लिया। पापा नौकरी के लिए बाहर रहेंगे। ऐसे में इस बच्ची का पालन पोषण कैसे होगा। इस समय वह अपने बाबा-दादी के पास है।
यमुनापुरम कॉलोनी के एके सिंह बताते हैं कि बच्चों के भविष्य को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कॉलोनी के कई बच्चों से संवाद भी किया और कहा कि मोबाइल पर हर समय न लगे रहें। मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ जरूरत के लिए करें।