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यौन उत्पीड़न पर बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्काल अपील दायर करे राज्य सरकार: बाल आयोग

Tue, 26 Jan 2021 01:57 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग - फोटो : सोशल मीडिया
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने महाराष्ट्र सरकार को यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्काल अपील दायर करने को कहा है। हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी की सजा घटाते हुए कहा था कि कपड़ों के ऊपर से बच्ची के शरीर को छूना यौन हमला नहीं माना जा सकता है।

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आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि फैसले की समीक्षा की जानी चाहिए और राज्य को इसका संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि नाबालिग पीड़ित के लिए बेहद अपमानजनक है। आयोग ने सरकार से नाबालिग पीड़ित की जानकारी मुहैया कराने को भी कहा है ताकि आयोग की ओर से उसे कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

हाईकोर्ट की नागपुर पीठ की जस्टिस पुष्पा गनेड़ीवाला के 19 जनवरी को दिए आदेश में कहा था कि यौन संबंध बनाने के इरादे से कपड़ों के अंदर हाथ डालकर या उन्हें हटाकर छूने का प्रयास करना ही यौन हमला माना जा सकता है। महज कपड़ों के ऊपर से जकड़ना यौन हमले की परिभाषा के तहत नहीं आता। आरोपी ने बिना कपड़े हटाए बच्ची को जकड़ा था, इसलिए उसका अपराध यौन हमला नहीं कहा जा सकता। हालांकि यह आईपीसी की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने के अपराध की श्रेणी में आएगा।
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फैसले से बाल अधिकार कार्यकर्ताओं में रोष
बाल अधिकारों के काम करने वाले संगठनों व कार्यकर्ताओं ने फैसले को अस्वीकार्य, अपमानजनक बताया है। एनजीओ 'बचपन बचाओ आंदोलन' के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा कि यह फैसला निश्चित तौर पर आक्रोशित करने वाला है। हमारी कानूनी टीम मामले को देख रही है और हम इनपुट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। वहीं ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेंस एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन ने इसे अपमानजनक फैसला करार देते हुए इसे कानून की भावना के खिलाफ बताया है।

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