राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (एनसीपीसीआर) ने शनिवार को पैगंबर को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान के मुद्दे पर प्रदर्शन में बच्चों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। आयोग ने इस सांप्रदायिक प्रदर्शनों में बच्चों के आने के मामले में एनआईए की जांच का भी समर्थन किया।
बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली इस संस्था ने अपील की है कि जिन राज्यों में सांप्रदायिक दंगें देखें है, वहां हिंसा में बच्चों के इस्तेमाल पर एनआईए की जांच होनी चाहिए। आयोग ने कहा कि प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल संदिग्ध संस्थानों का कारनामा हो सकता है।
एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने एक ट्वीट में कहा, "देश में पिछले सप्ताह हुई साम्प्रदायिक हिंसा में बच्चों का उपयोग व दंगाइयों द्वारा खुद के बचाव के लिए बच्चों को आगे करने के मामले संदिग्ध संगठनों द्वारा समन्वित संचालित हो सकते हैं। राज्य सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे एनआईए द्वारा जांच हेतु केंद्र सरकार को अनुशंसा करें।
गौरतलब है कि 10 जून को देशभर के कई हिस्सों में भाजपा के दो प्रवक्ताओं के विवादित बयान पर हिंसा भड़क उठी थी। जिन राज्यों में हिंसा हुई थी, उनमें उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड तक शामिल थे। इन संगठनों की मांग थी कि पुलिस भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल को गिरफ्तार कर उन पर कठोर कार्रवाई करे।