23 नवंबर की सुबह देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने क्रमश: मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पवार देवेंद्र फडणवीस के पास एनसीपी के सभी 54 विधायकों के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी लेकर गए थे। अजित पवार के कहने पर कुछ एनसीपी विधायक राजभवन शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे थे, लेकिन शपथ ग्रहण के कुछ घंटे बाद करीब-करीब सभी विधायक शरद पवार के साथ लौट आए थे। इसके ठीक अगले दिन अजित पवार ने साफ कहा था कि वह एनसीपी में हैं और एनसीपी में ही रहेंगे।
26 नवंबर को उच्चतम न्यायालय का फैसला आया। फैसला आने के कुछ समय बाद अजित पवार उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर एनसीपी में लौट आए। वह एनसीपी के महाराष्ट्र में कद्दावर नेता बने हैं। सभी महत्वपूर्ण बैठकों में पहले की तरह हैं। उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने, विधायक दल का नेता बनाए रखने तक की चर्चा चल रही है। इतना ही 28 नवंबर को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में उनकी बड़ी भूमिका रहने वाली है। उनके नेता भी शरद पवार ही हैं।
बस फर्क है कि वह भाजपा के साथ गए थे और अब लौट आए हैं। अजीत पवार के एनसीपी के साथ बने रहने पर महाराष्ट्र में सरकार बनाने का पूरा प्रकरण न तो उससे उगला जा रहा है और न ही निगल जा रहा है। यहां तक कि शिवसेना के नेतृत्व वाली कांग्रेस-एनसीपी की सरकार भी उसे हमज नहीं हो रही है।