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मुंबई: शरद पवार ने किया बाबासाहेब को याद, कहा- पड़ोसी देशों में अस्थिरता के बीच उनके दिए संविधान से भारत एकजुट

Thu, 14 Apr 2022 06:27 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुम्बई

सार

शरद पवार ने कहा कि भारत एक महाद्वीप जैसा देश है, यहां अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग जातियों के लोग  रहते हैं साथ ही यहां अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग हैं। फिर भी भारत की स्थिरता बरकरार है। इसके पीछे बाबासाहेब द्वारा दिया गया संविधान है। 
 
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एनसीपी प्रमुख शरद पवार - फोटो : ANI
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विस्तार
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राकांपा प्रमुख शरद पवार ने गुरुवार को डॉक्टर बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर भारत के संविधान के लिए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब पड़ोसी देश श्रीलंका और पाकिस्तान अस्थिरता का सामना कर रहे हैं, डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के कारण भारत स्थिर और एकजुट बना हुआ है। शरद पवार ने कहा कि देश के प्रति बाबासाबेह का योगदान निर्विवाद है और उनके योददान ने राजनीतिक दृष्टिकोण से भारत को स्थिरता देने का काम किया।

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पवार ने ये बातें बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की 131वीं जयंती पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, राज्य के जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल और अन्य लोग भी शामिल हुए।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीलंका अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश के 22 मिलियन लोग बिजली कटौती, भोजन, ईंधन और दवाओं जैसी अन्य आवश्यक वस्तुओं की अत्यधिक कमी का सामना कर रहे हैं।
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इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान में चल रही उठापटक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हाल ही में एक राजनीतिक उथल-पुथल देखी गई है। वहां की इमरान खान सरकार को विपक्ष द्वारा अविश्वास मत के माध्यम से बाहर कर दिया गया था। जिसके बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेता शहबाज शरीफ ने खान की जगह पड़ोसी देश के प्रधान मंत्री के रूप में पदभार संभाला है।
 
शरद पवार ने कहा कि भारत एक महाद्वीप जैसा देश है, यहां अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग जातियों के लोग  रहते हैं साथ ही यहां अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग हैं। फिर भी भारत की स्थिरता बरकरार है। इसके पीछे बाबासाहेब द्वारा दिया गया संविधान है। उनके संविधान के कारण ही यह देश एकजुट रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में अंबेडकर के योगदान को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। भले ही उन्हें संविधान के निर्माता के रूप में जाना जाता हो, लेकिन वे महत्वपूर्ण अर्थशास्त्री भी थे।

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