राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने मंगलवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की मुंबई पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें संकटग्रस्त कंपनी दीवान हाउसिंह फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के कर्जदाताओं को कंपनी के पूर्व प्रमोटर कपिल वधावन के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा गया था।
साथ ही एनसीएलएटी ने एनसीएलटी को भी निर्देश दिया है कि वह पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंह फाइनेंस की तरफ से डीएचएफएल के लिए दाखिल प्रस्ताव को लेकर प्रशासकों की तरफ से दायर याचिका पर निर्णय जारी करे।
एनसीएलएटी के कार्यवाहक चेयरमैन जस्टिस एआईएस चीमा और सदस्य तकनीकी वीपी सिंह की दो सदस्यीय पीठ ने हालांकि यह स्पष्ट किया है कि उसके इस आदेश से कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) की तरफ से चुनी गई योजना की मंजूरी में बाधा नहीं आएगी।
बता दें कि एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने 19 मई को डीएचएफएल के प्रशासकों को कपिल वधावन की तरफ से पेश दूसरे समाधान प्रस्ताव को 10 दिन के अंदर सीओसी के सामने विचार के लिए रखकर उनके निर्णय की जानकारी देने का निर्देश दिया था। इस निर्णय को प्रशासकों और सीओसी की तरफ से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने एनसीएलएटी में चुनौती दी थी।