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NCB: एनसीबी ने पन्ने पर 'चाटने वाले नशे' का किया भंडोफोड़, इंटरनेट की काली दुनिया से चलता था गोरखधंधा

Tue, 01 Aug 2023 03:41 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली

सार

इंटरनेट की काली दुनिया 'डार्क इंटरनेट' के माध्यम से पन्ने पर 'चाटने वाला नशा' तैयार होता है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 'जम्बाडा कार्टेल' के नाम से चलाए जा रहे रैकेट का खुलासा किया है। 
 
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एनसीबी ने ड्रग रैकेट का किया भंडाफोड़ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो 'एनसीबी' की दिल्ली क्षेत्रीय इकाई द्वारा नशे के सौदागारों से जुड़े एक सनसनीखेज रैकेट का खुलासा किया गया है। इस नशे को एलएसडी (लिसर्जिक एसिड डायथाइलमाइड) का नाम दिया गया है जो एक हेलुसीनोजेनिक दवा होती है। खास बात ये है कि यह नशा, किसी सॉलिड फॉर्म में नहीं है, बल्कि इसे कागज पर उकेरा जाता है। इंटरनेट की काली दुनिया 'डार्क इंटरनेट' के माध्यम से पन्ने पर 'चाटने वाला नशा' तैयार होता है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 'जम्बाडा कार्टेल' के नाम से चलाए जा रहे रैकेट का खुलासा किया है। 

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इस मामले में अभी तक कुल छह मामले दर्ज किए गए हैं। एलएसडी हॉलुसिनोजेन्स, लोगों को अपने आसपास की दुनिया को समझने के तरीके को बदलता है। इसे एसिड, ब्लोट्स, स्टैम्प आदि के रूप में भी जाना जाता है। एलएसडी गंधहीन, रंगहीन और बेस्वाद है। इसे कागज के छोटे वर्गों पर चित्रित किया जा सकता है। इसके बाद लोग इसे चाटते हैं या निगलते हैं। एलएसडी जगह, दूरी और समय की इंद्रियों को बदलने का कारण बनता है। लोग कह सकते हैं कि वे रंगों को 'सुनते' हैं  या ध्वनि 'देखते' हैं। वे समझते हैं कि उनमें भ्रमित करने वाली और असरदार भावनाएं हैं। 

जम्बाडा कार्टेल, 5 स्टार रेटिंग दी गई है ...  
एनसीबी के उप महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह (प्रचालन एवं प्रवर्तन) ने मंगलवार को बताया, दिल्ली क्षेत्रीय इकाई ने डार्कनेट पर जम्बाडा कार्टेल के लोकप्रिय नाम से चलाए जा रहे सबसे बड़े एलएसडी कार्टेल को ध्वस्त किया है। तीन माह के भीतर डार्कनेट पर दो बड़े भारतीय एलएसडी कार्टेल को ध्वस्त किया गया है। जम्बाडा कार्टेल डार्कनेट पर एकमात्र भारतीय एलएसडी कार्टेल है, जिसे अवैध तस्करों और उपभोक्ताओं द्वारा 5 स्टार रेटिंग दी गई है। 
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भारत में खोलना था पहला एलएसडी आउटलेट 
जम्बाडा कार्टेल का इरादा भारत में पहला एलएसडी आउटलेट खोलने का था, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं के आदान प्रदान के साथ एक लाख एलएसडी ब्लॉट्स का न्यूनतम स्टॉक होता है। ड्रग्स के आयात और इसके अखिल भारतीय वितरण में शामिल 22 भारतीयों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित व्यक्तियों के पास से 29,013 एलएसडी ब्लोट्स (जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है), 472 ग्राम एमडीएमए पाउडर और 51.38 लाख रुपये की ड्रग मनी जब्त की गई। एलएसडी की वाणिज्यिक मात्रा लगभग 6 ब्लॉट्स है। इन मामलों में लगभग 5000 गुना वाणिज्यिक मात्रा में एलएसडी जब्त किया गया है। 

तकनीक की समझ रखने वालों की भागीदारी ... 
एनसीबी के मुताबिक, इस मामले में शिक्षित युवा और तकनीक की समझ रखने वाले पेशेवरों/छात्रों की भागीदारी रही है। दिल्ली एनसीआर, हैदराबाद और बेंगलुरु के प्रोफेशनल केंद्र, मुख्य निशाने पर थे। वर्चुअल पहचान और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग होता था। ये लोग सोशल मीडिया साइटों के माध्यम से एक दूसरे के साथ संपर्क करते थे। डिलीवरी मोड का तरीका, मुख्य रूप से नकली पते/मोबाइल नंबरों पर कूरियर भेजना होता था। भुगतान केवल क्रिप्टोकरेंसी और उनके रूपांतरण के माध्यम से प्राप्त किए जाते थे। 

एनसीबी ने तीन प्रमुख एलएसडी कार्टेल की पहचान की है
खास बात यह रही कि इस धंधे में विक्रेताओं और खरीदारों के बीच कोई मौखिक संचार नहीं किया गया। डार्कनेट पर सक्रिय एलएसडी कार्टेल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एनसीबी ने तीन प्रमुख एलएसडी कार्टेल की पहचान की है, जिनका कारोबार देश भर में फैला हुआ था। इन कार्टेल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली क्षेत्रीय इकाई द्वारा विशेष टीमों का गठन किया गया। गहन साइबर गश्त और तकनीक के साथ-साथ फील्ड निगरानी के बाद, 19 अप्रैल 2023 को एक ऑपरेशन शुरू किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 15,000 एलएसडी ब्लॉट्स (वाणिज्यिक मात्रा के 2500 गुना से अधिक), 44 ग्राम एमडीएमए और 24.65 लाख रुपये की ड्रग मनी की जब्ती/ फ्रीज के साथ देश में दूसरे सबसे बड़े डार्कनेट एलएसडी कार्टेल को ध्वस्त करने में पहली सफलता मिली।



एनसीआर में था कार्टेल का मास्टरमाइंड
निरंतर अभियानों के जरिए यह पता चला कि डार्कनेट पर एलएसडी में काम करने वाला सबसे बड़ा कार्टेल यानी 'जम्बाडा कार्टेल' दिल्ली एनसीआर से संचालित होता है। ग्राउंड सर्विलांस द्वारा उत्पन्न सुरागों को आगे बढ़ाते हुए और तकनीकी निगरानी की अतिरिक्त सहायता से, इस कार्टेल के दो ग्राउंड ऑपरेटरों की पहचान की गई। एनसीबी की टीमों द्वारा उन पर दिन-रात नजर रखी गई, जिससे इस कार्टेल के मास्टरमाइंड का बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) में होने का पता चला। तत्पश्चात इन व्यक्तियों के परिसरों में कई छापे मारे गए, जिसके परिणामस्वरूप 13,863 एलएसडी ब्लॉट्स, 428 ग्राम एमडीएमए और 26.73 लाख ड्रग मनी जब्त/फ्रीज की गई। 

 22 भारतीयों को गिरफ्तार किया है
एनसीबी, दिल्ली क्षेत्रीय इकाई द्वारा इन एलएसडी कार्टेलों के खिलाफ अब तक कुल छह मामले दर्ज किए गए हैं। हमने ड्रग्स के आयात और इसके अखिल भारतीय वितरण में शामिल 22 भारतीयों को गिरफ्तार किया है। इन 6 मामलों से आरोपी व्यक्तियों से 29,013 एलएसडी ब्लॉट्स, 472 ग्राम एमडीएमए पाउडर और 51.38 लाख रुपये की ड्रग मनी जब्त/फ्रीज की गई है।डार्कनेट पर कार्टेल द्वारा बेची गई ड्रग की क्षमता और उनकी ग्राहक सेवा के आधार पर 1 स्टार से 5 स्टार के पैमाने पर रेट तय किया जाता है। जम्बाडा कार्टेल पांच स्टार रेटिंग के साथ देश का एकमात्र कार्टेल था।

तेजी से पैसा और डार्कनेट ऑपरेशंस की गुमनामी ... 
एनसीबी के उप महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह ने बताया, तेजी से पैसा और डार्कनेट ऑपरेशंस की गुमनामी ने इन युवाओं को ड्रग डीलिंग में धकेल दिया। ओटीटी प्लेटफार्मों पर विभिन्न वेब श्रृंखलाओं ने उनके संचालन के तरीके को प्रेरित किया। उन्होंने इस कार्टेल का नाम 'इस्माइल-मार्लो जम्बाडा गार्सिया' से प्रेरित होकर रखा। यह एक मैक्सिकन ड्रग लॉर्ड है और मेक्सिको के 37 सबसे वांछित ड्रग लॉर्ड्स की सूची में अंतिम शेष भगोड़ा है। उस पर $15,000,000 अमेरिकी डॉलर तक का इनाम है।

हैदराबाद पुलिस ने सितंबर 2022 में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। उस मामले में जम्बाडा  कार्टेल का नाम सामने आया था। जम्बाडा  कार्टेल ने इस घटना के बाद डार्कनेट पर घोषणा की थी कि वह सुरक्षित हैं और वह कभी नहीं पकड़ा जाएगा और बिना किसी हिचकिचाहट के काम करता रहेगा। वह Dr. Seuss अका डीएस और टीएस (Tribe Seuss) व गामा गोबलिन के नाम से एक डार्कनेट ऑपरेटर के साथ निकट संपर्क में था, जो दुनिया भर में एलएसडी के सबसे बड़े स्रोत है। जम्बाडा का इरादा Dr. Seuss का इंडिया आउटलेट खोलने का था, जिसमें उसे  1,00,000 एलएसडी ब्लॉट्स का न्यूनतम स्टॉक बनाए रखना था। Dr. Seuss के के यूके, यूएसए, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, रूस, स्पेन, पुर्तगाल, ग्रीस और तुर्किए  में आउटलेट हैं। उन्होंने पहले से ही इस उद्देश्य के लिए लोगों की भर्ती शुरू कर दी थी। पहले से ही लॉजिस्टिक्स और स्थान का निर्धारण कर लिया था। कार्टेल का काम विभिन्न क्रिप्टो वॉलेट में ड्रग्स की आय एकत्र करना था और फिर इसे क्रिप्टोकरेंसी की विभिन्न परतों में स्थानांतरित करना था ताकि अंत में उनके बैंक खातों में धन प्राप्त किया जा सके।
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निर्णय और व्यवहार को भी प्रभावित करता है एलएसडी ... 
एलएसडी निर्णय और व्यवहार को भी प्रभावित करता है, उपयोगकर्ता खुद को खतरनाक स्थिति में पा सकते हैं। शारीरिक परिवर्तनों में हृदय गति और रक्तचाप में वृद्धि, मांसपेशियों में बदलाव और झटके, फैली हुई पुतलियां, पसीना, नींद न आना और भूख में कमी शामिल हैं। एनसीबी के अनुसार, डिजिटल प्लेटफार्मों, डार्क नेट और डार्क वेब का उपयोग करके युवा तकनीक से प्रेम करने वाली पीढ़ी के ड्रग्स की तस्करी में शामिल होने की प्रवृत्ति उभरी है। क्रिप्टो मुद्राओं और आभासी पहचान का उपयोग समाज के लिए एक खतरनाक अवधारणा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो एक संगठन के रूप में डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के खतरे को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। डार्क नेट के माध्यम से ड्रग्स की तस्करी के खतरे को कम करने के लिए एनसीबी ने डार्कथॉन का आयोजन किया था, जिसका उद्देश्य डार्क-नेट को क्रैक करने के समाधान खोजने वाले बुद्धिमान युवाओं  को पुरस्कृत करना था।

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