अधिकारियों ने बताया कि नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार, आईएल-38 स्क्वाड्रन के वरिष्ठ अधिकारी, नाविक और अन्य गणमान्य व्यक्ति अपने परिवारों के साथ इस कार्यक्रम में मौजूद थे और उन्होंने इसकी शानदार सेवा को याद किया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईएनएएस 315 को एक अक्तूबर, 1977 को आईएल-38 विमान के बेड़े में शामिल किया गया था, इसके साथ ही नौसेना में लंबी दूरी की समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी युद्ध के आधुनिक युग की शुरुआत हुई थी।
अपनी अनूठी क्षमताओं, अद्भुत कौशल और विशाल हिंद महासागर क्षेत्र को कवर करने वाली विस्तारित पहुंच के साथ आईएल-38 एसडी ने वर्षों से खुद को एक दुर्जेय बल गुणक साबित किया है।
अधिकारी ने बताया कि स्क्वाड्रन के शिखर को सुशोभित करने वाा शक्तिशाली विंग्ड स्टैलियन स्क्वाड्रन के आदर्श वाक्य 'विक्ट्री इज माय प्रोफेशन' पर खरा उतरा है। यह देश की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करने के अपने प्रयास में समुद्र के ऊपर और नीचे कड़ी निगरानी रखता है।
इस मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि भारत का 'मानवरहित रोडमैप' न केवल मानवरहित विमानों (यूएवी) के लिए है, बल्कि मानवरहित प्रणालियों के लिए भी है। उन्होंने कहा, भारत का मानवरहित रोडमैप सिर्फ यूएवी के लिए नहीं बल्कि यह मानवरहित प्रणालियों के लिए भी है। रोडमैप को रक्षा मंत्रालय के अनुमोदन से वर्ष 202 में प्रख्यापित किया गया है। मानव रहित विमानों को शामिल करने की दिशा में काम प्रगति पर है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने तीनों सेवाओं के लिए 31 एचएएलई (उच्च ऊंचाई वाले लंबे समय तक चलने वाले) श्रेणी के मानव रहित हवाई वाहनों के मामले को लेने की मंजूरी दे दी है।हम अलग-अलग क्षमताओं, कार्यों के लिए अलग-अलग सहनशक्ति वाले मानव रहित निगरानी जहाजों, मानव रहित पानी के नीचे के जहाजों पर भी ध्यान दे रहे हैं।