नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सुलभता शिखर सम्मेलन 2025 में भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने कहा कि विकलांगजनों के प्रति समावेशन नौसेना के लिए सिर्फ कर्तव्य नहीं बल्कि आस्था है। इस दौरान उन्होंने नौसेना की कई योजनाओं की जानकारी दी।
भारतीय नौसेना ने खास जरूरतों वाले लोगों यानी दिव्यांगो के लिए एक सराहनीय पहल की है। नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि नौसेना सभी को समान अवसर देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हम इसे सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपनी आस्था मानते हैं कि हर व्यक्ति को बराबरी से सम्मान और अवसर मिले।
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नई दिल्ली में हुए नेशनल समिट ऑन एक्सेसिबिलिटी 2025 के दौरान वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने बताया कि नौसेना ने कई योजनाएं शुरू की हैं ताकि विशेष रूप से सक्षम लोग समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। उन्होंने बताया कि नौसेना ने संकल्प स्कूल शुरू किए हैं, जहां विशेष बच्चों को पढ़ाया जाता है। इसके अलावा, अर्ली इंटरवेंशन सेंटर भी बनाए गए हैं, जो छोटे बच्चों में विकलांगता को समय रहते पहचानने और उन्हें सामान्य स्कूलों में शामिल करने में मदद करते हैं।
सामाजिक और आर्थिक नजरिया
एनजीओ स्वयम की संस्थापक सिम्नु जिंदल ने कहा कि सुलभता सिर्फ सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत को हर साल लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का नुकसान सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि हमारे व्यवसाय और संस्थान सभी के लिए सुलभ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर खेल, पर्यटन, परिवहन और तकनीक को अधिक सुलभ बनाया जाए तो लाखों लोगों के लिए रोजगार और नए अवसर खुल सकते हैं।
ऐतिहासिक जगहों पर सुलभता के प्रयास
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व निदेशक के. के. मुहम्मद ने बताया कि अब भारत के सभी बड़े स्मारक विकलांग लोगों के लिए सुलभ बनाए जा रहे हैं। यह काम 2008 में स्वयम एनजीओ के साथ शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि पहले कई प्रसिद्ध लोग स्मारकों तक नहीं जा पाते थे, लेकिन अब रैंप, रेलिंग और समावेशी शौचालय जैसी सुविधाएं लगने से सभी के लिए पहुंच आसान हो गई है। इससे स्मारकों की आमदनी भी बढ़ी है।
भारत की बढ़ती भूमिका
यूनेस्को के अधिकारी टिम कर्टिस ने कहा कि भारत के पास सुलभता के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत परिवहन, पर्यटन और खेलों में सभी के लिए समान सुविधा उपलब्ध कराता है तो यह पूरी दुनिया के लिए उदाहरण बन सकता है। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और योजनाकारों ने चर्चा की कि भारत को सुलभ विकास की दिशा में कैसे आगे बढ़ाना है।