केंद्र सरकार न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों की व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत एक स्वतंत्र राष्ट्रीय आयोग बनाया जाएगा, जो विभिन्न ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन से जुड़े काम देखेगा। आयोग में न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके जरिए नियुक्तियों में स्पष्ट मानक, पारदर्शी प्रक्रिया और संस्थागत स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।
विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन के लिए एक आयोग गठित करने वाला विधेयक अगले सप्ताह लोकसभा में पेश किया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया जा रहा है। प्रस्तावित न्यायाधिकरण सुधार विधेयक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति तथा उनकी योग्यता में दक्षता बढ़ाना, स्वतंत्रता सुनिश्चित करना, पारदर्शिता लाना और एकरूपता कायम करना है।
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अगले सप्ताह लोकसभा में पेश किए जाने वाले इस विधेयक में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का भी प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी में मुख्यालय वाले प्रस्तावित आयोग में एक अध्यक्ष और चार सदस्य होंगे। इनमें दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य होंगे।
कौन होंगे प्रस्तावित आयोग का अध्यक्ष बनने के पात्र?
प्रस्तावित आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश पात्र होंगे। लोकसभा सदस्यों को वितरित किए गए विधेयक में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल में न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था।
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शीर्ष अदालत ने इन प्रावधानों को शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत माना था। अदालत ने यह भी कहा था कि ये प्रावधान न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और कामकाज से जुड़े मानकों को स्पष्ट करने वाले पहले के न्यायिक फैसलों के अनुरूप नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का भी निर्देश दिया था, जो स्वतंत्र हो और जिसमें पेशेवर विशेषज्ञता हो। अदालत ने कहा था कि आयोग को विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन एवं नियुक्ति के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था अपनानी चाहिए।
विधेयक के कानून बनने के बाद न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 समाप्त हो जाएगा। प्रस्तावित नए कानून में विधेयक में शामिल विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता भी निर्धारित की गई है। इसके अलावा चयन की प्रक्रिया, नियुक्ति, वेतन और भत्ते, इस्तीफा, पद से हटाने और सेवा की अन्य शर्तों से जुड़े प्रावधान भी इसमें किए गए हैं।