पिछले साल कश्मीर में हिजबुल कमांडर बुरहान बानी की मौत के बाद घाटी के स्कूलों में आग लगाने और नौजवानों के हाथ में पत्थर के साथ पेट्रोल बम थमाने के लिए कुछ अलगाववादी तत्वों को खास फंडिंग की जा रही थी। नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को इस फंडिंग के मनी ट्रेल में कश्मीर में उपद्रव की पाकिस्तान की नई योजनाओं का खुलासा हो रहा है।
सूत्रों के मुताबिक इन अलगाववादियों को घाटी के कम से कम 5000 स्कूलों को जलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। संभवत इसका मकसद घाटी से आम परिवार को लड़कों को स्कूल से दूर रखना या पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर करना है।
सोमवार को एनआईए मुख्यालय में तीन अलगाववादियों की चली लंबी पूछताछ में यह साफ हो गया है कि बुरहान की मौत के बाद घाटी की आशांति स्वाभाविक नहीं थी बल्कि बड़ी चालाकी से रची गई साजिश का हिस्सा थी। इतना ही नहीं इस साल बर्फ पिघलने के बाद चल रहा हिंसा का दौर भी उसी योजना का विस्तार है। इसके लिए घाटी में मौजूद पाकिस्तानी तंत्र ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं।
सोमवार को एनआईए ने फारुक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, नईम खान और जावेद अहमद बाबा उर्फ गाजी से लंबी पूछताछ की। देर शाम तक यह पूछताछ जारी थी। एनआईए सूत्रों ने बताया कि जिस तरह से सुराग मिल रहे हैं उनके आधार पर इनसे आने वाले दो तीन दिन तक पूछताछ की जाएगी।
एनआईए ने इन्हें कुछ खास बैंक एकाउंट और संपत्ति से संबंधित कागजात साथ लाने को कहा था। गौरतलब है कि इन तीनों ने एक स्टिंग ऑपरेशन में स्वीकारा है कि घाटी में उपद्रव के लिए इन्हें पैसे दिए जाते थे। एनआईए पहले भी इन तीनों से शुरुआती पूछताछ कर चुकी है।