मरीजों को घर बैठे अब अपने आसपास की सरकारी व निजी प्रयोगशाला की जानकारी निशुल्क मिल सकेगी। देशभर की जांच प्रयोगशालाओं की जियो मैपिंग का काम शुरू हाे गया है। पहले चरण में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सहित छह राज्यों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। इनमें हेमेटोलॉजी से लेकर क्लिनिकल केमिस्ट्री और मॉलिक्यूलर जांच प्रयोगशालाएं भी शामिल हैं।
मरीजों का समय पर इलाज शुरू हो सके, इसकी पहल करते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अधीन राष्ट्रीय पैथोलॉजी संस्थान ने एक टास्क फोर्स का गठन करने के साथ ही वेबसाइट www.icmrdisha.in भी बनाई है। राष्ट्रीय पैथोलॉजी संस्थान की निदेशक डॉ. उषा अग्रवाल का कहना है कि आखिरी छोर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए परीक्षणों के स्थान और उपलब्धता तक हर किसी की पहुंच बेहद जरूरी है। उन्हें पहचानने के लिए जीआईएस तकनीक को अपनाया है। इसके तहत, प्रयोगशालाओं की जानकारी प्रदर्शित करने के लिए दिशा नामक व्यापक गतिशील ऑनलाइन मानचित्र सेवा शुरू की है।
70 फीसदी मरीजों का इलाज जांच के बाद होता है शुरू
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में हर दिन 60 से 70 फीसदी मरीजों का इलाज प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाता है। बाकी 30 से 40 फीसदी मरीज आपातकालीन चिकित्सा से जुड़े होते हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि मरीजों को समय पर इलाज मिलने के लिए प्रयोगशाला जांच की भूमिका कितनी अहम है?