2027 तक मिलने लगेगी 500 मीट्रिक टन हाइड्रोजन
डीएसटी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया, मिशन इनोवेशन के तहत हाइड्रोजन वैली का निर्माण किया जाएगा। पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है और यह 2027 तक चलेगा। तब तक देश में प्रति वर्ष 500 मीट्रिक टन हाइड्रोजन का उत्पादन होने लगेगा। पहले चरण के लिए 90 करोड़ रुपये का बजट तय किया है जो हाइड्रोजन वैली बनाने पर खर्च किया जाएगा।
- इस बजट में और भी बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके बाद दूसरा चरण 2028-33 और तीसरा चरण 2034 से 2050 तक चलेगा।
बनेगा इंटर कनेक्टेड इकोसिस्टम
- मौजूदा समय में हाइड्रोजन उत्पादन को लेकर देश के चार शहर दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरू और चेन्नई में अनुसंधान एवं विकास की गतिविधियां चल रही हैं। डीएसटी के मुताबिक, हाइड्रोजन की संपूर्ण मूल्य शृंखला (उत्पादन, भंडारण और परिवहन) को एक ही स्थान पर लाया जाएगा जो हाइड्रोजन वैली में होगा। यहीं से पूरे देश में हाइड्रोजन की आपूर्ति होगी और इंटर कनेक्टेड इकोसिस्टम बनाया जाएगा।
2023 अप्रैल तक हाइड्रोजन वैली बनाने वाली एजेंसियों का चयन
- 2070 तक ग्रीन ऊर्जा की मांग पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन क्षेत्रों में किया जाएगा उपयोग
- कार/ट्रेन/विमान/जहाज
- बिजली उत्पादन
- पोर्टेबल ईंधन सेल
- सरकारी और निजी एजेंसियों के साथ मिलकर हाइड्रोजन वैली बनाएगी सरकार।
- 30 दिसंबर तक प्रस्ताव लेने के बाद शुरू होगा वैली बनाने के लिए जगह का चयन।
समय से पहले हासिल होगा लक्ष्य
- डीएसटी ने दावा किया है कि हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया जाएगा। राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत नवीकरणीय ऊर्जा के रूप में 2030 तक 10 लाख टन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
- उर्वरक संयंत्रों और तेल रिफाइनरियों को हाइड्रोजन का उपयोग करने के लिए क्रमशः 5% और 10% की आपूर्ति 2023-2024 तक होगी। इसके बाद, 2030 तक इस आपूर्ति को बढ़ाकर क्रमशः 20% और 25% तक लेकर जाएंगें।
- साल 2000 से अब तक भारत ने जीवाश्म ईंधन के आयात पर अपनी निर्भरता बढ़ाई है। कोयला, तेल और गैस आयात की मांग में यह बढ़ोतरी क्रमशः 25%, 75% और 50% से अधिक है।