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जम्मू-कश्मीर: डर कहें या मजबूरी, 'अब्दुल्ला-महबूबा' ने तो मोदी की राह पर चलने का मन बना लिया!

Mon, 14 Jun 2021 06:37 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉ. अब्दुल्ला ने अपने बयान में एक बार फिर पाकिस्तान का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा, हम 'पाकिस्तानी' नहीं हैं। हम भारतीय नागरिक हैं। हम भारत में एक पार्टी हैं और जब हम अपनी बात करते हैं तो हम पर 'पाकिस्तानी एजेंट' होने का लेबल लगा दिया जाता है। खुदा का वास्ता है हम पर पाकिस्तान का लेबल मत लगाइए...
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Gupkar meeting - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में सियासत की सरगर्मी जोर पकड़ने लगी है। सात माह तक चुप बैठने के बाद 'गुपकार' समझौते में शामिल नेता अब बोल रहे हैं। ये उनका डर कहें या मजबूरी, मगर अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चलने का मन बना रहे हैं। 'नेशनल कांफ्रेंस' और 'पीडीपी', जम्मू-कश्मीर की परीसीमन प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। हालांकि वे कह रहे हैं कि केंद्र को कश्मीरियों का दिल जीतना है तो उन्हें वह सब कुछ लौटाना होगा जो पांच अगसत 2019 को कश्मीरियों से छीना गया है। उनकी जुबान से जो बयान निकल रहे हैं, उनमें 'पाकिस्तान' का नाम आ ही जाता है। जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा एवं राजनीतिक मामलों के विश्लेषक और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं, अब पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) वाले दलों के पास दूसरा विकल्प भी तो नहीं है। वे चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा मिल जाए। यही वजह है कि अब वे सभी नेता एकाएक 'गुपकार' बैठक में प्रकट हो गए हैं। नेशनल कांफ्रेंस के संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा ने तो राजौरी क्षेत्र की नेकां इकाई के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी कर ली है।

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हम पर 'पाकिस्तानी एजेंट' होने का लेबल लगा दिया जाता है...

जम्मू-कश्मीर में परीसीमन प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसके लिए जल्द ही वहां के सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई जाएगी। अभी तक केंद्र की आलोचना करने वाले 'नेशनल कांफ्रेंस' और 'पीडीपी' जैसे दल अब परीसीमन प्रक्रिया में शामिल होने की बात कर रहे हैं। पीएजीडी के अध्यक्ष डा. फारूक ने कहा, जम्मू-कश्मीर का जब भारत में विलय हुआ तो कुछ शर्तों पर हुआ था। उनमें अनुच्छेद 370 भी एक था। केंद्र सरकार को इस पर दोबारा से विचार करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर मसले पर इंसानियत और जम्हूरियत का वादा किया था, लेकिन 2019 में जो हुआ वह जम्हूरियत नहीं थी।

डॉ. अब्दुल्ला ने अपने बयान में एक बार फिर पाकिस्तान का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा, हम 'पाकिस्तानी' नहीं हैं। हम भारतीय नागरिक हैं। हम भारत में एक पार्टी हैं और जब हम अपनी बात करते हैं तो हम पर 'पाकिस्तानी एजेंट' होने का लेबल लगा दिया जाता है। खुदा का वास्ता है हम पर पाकिस्तान का लेबल मत लगाइए। पीएजीडी के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के अनुच्छेद 370 को लेकर दिए गए बयान का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था, दिग्विजय सिंह ने कश्मीरियों की भावनाओं को समझकर ही यह बयान दिया है। बता दें कि सिंह ने अपने बयान में कहा था, अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो अनुच्छेद 370 के हटाए जाने को दोबारा से देखेगी।
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महबूबा मुफ्ती की जुबान पर भी 'पाकिस्तान' का नाम आ गया...  

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बयान आने के बाद जब आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हुआ तो पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी मैदान में कूद पड़ीं। उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'शुक्र है कि अंबेडकर जी आज जिंदा नहीं हैं वरना भाजपा उन्हें भी पाकिस्तान का समर्थक बताकर उनकी बदनामी करती'। इससे पहले कि भाजपा उनके बारे में कोई बयान जारी करते, उन्होंने खुद ही 'पाकिस्तान' का नाम ले दिया। पिछले सप्ताह भाजपा ज्वाइन करने वाले कांग्रेसी जितिन प्रसाद ने दिग्विजय सिंह के वीडियो को रिट्वीट करते हुए लिखा, 'वे अपने पाकिस्तान समर्थित विचारों के लिए जाने जाते हैं, इस तरह से वह एक दिन पाकिस्तान के विभाजन के लिए इंदिरा जी की भी निंदा कर सकते हैं।

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) के अनुसार, 'गुपकार' समझौते में शामिल नेताओं की पोल खुल गई है। उन्हें अपना राजनीतिक करियर चौपट नजर आ रहा है। ये वही नेता हैं, जिन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर भारत की छवि खराब करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। अब इनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है, इसलिए ये चुपके से परीसीमन प्रक्रिया में भाग लेने की बात कह रहे हैं। इन्हीं नेताओं ने गत सप्ताह यह अफवाह उड़ा दी थी कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर का विभाजन करने जा रही है। जम्मू को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा, इन नेताओं की कोरी अफवाहों को सच मानकर पाकिस्तान ने भी बयान जारी करने में देर नहीं लगाई। यहां के लोग यह बात अच्छे से समझ चुके हैं कि पाकिस्तान के हितैषी कौन हैं। घाटी में इतने लम्बे समय से आतंकवाद खत्म क्यों नहीं हो पा रहा है।
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