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सबको साथ लेकर ही राष्ट्र आगे बढ़ सकता है: भागवत

Sat, 12 Mar 2016 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नागौर

सार

  • सामाजिक और आपसी वैमनश्यता के आधार पर कोई भी राष्ट्र नहीं चल सकता है।
  • बदल सकती है संघ की ड्रेस, नीली पेंट के साथ ग्रे पेंट भी रेस में आगे।
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
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विस्तार
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संघ प्रमुख मोहन राव भागवत ने कहा है कि सामाजिक और आपसी वैमनश्यता के आधार पर कोई भी राष्ट्र नहीं चल सकता है। उन्होंने कहा है कि सामाजिक समरसता और सबको साथ लेकर ही राष्ट्र आगे बढ़ता है।
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प्रतिनिधि सभा बैठक के दूसरे दिन अपने तृतीय सर संघचालक बाला साहब देवरस के जीवन की गाथा देशभर से आए संघ के शीर्ष अधिकारियों को सुनाते हुए भागवत ने सामाजिक समरसता पर जोर देने का आह्वान किया।

निकर हटाने की कवायद में ग्रे पेंट भी रेस में आगे

संघ की ओर से किए जा रहे गणवेश के बदलाव में निक्कर का आना तो लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन रंग को लेकर अब भी असमंजस कायम है। इसपर अंतिम निर्णय रविवार को होना है।
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सूत्र बताते हैं कि नीली पेंट के साथ ग्रे पेंट भी रेस में आगे दौड़ रही है। बैठक में चार स्वयं सेवकों को दोनों ही रंग की पेंट पहनाकर उसका प्रदर्शन किया गया।

निजी स्कूलों और अस्पतालों पर लगाम लगाए सरकार

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ - फोटो : getty
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मानना है कि देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। इनके जरिये लाभ कमाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।

आरएसएस ने इसके लिए केंद्र सरकार से निजी स्कूलों व अस्पतालों पर लगाम कसने की हिदायत दी है। नागौर में चल रही संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठकों के दूसरे दिन इस संबंध में दो प्रस्ताव पारित किए गए।

संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख अनिरुद्ध देशपांडे ने बताया कि संघ ने यह महसूस किया है कि देश में छात्रों के लिए शिक्षा के अवसर तो उपलब्ध हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बहुत महंगी हो गई है।

सरकार शिक्षा का बजट कम कर रही है और इससे शिक्षा के जरिये लाभ कमाने वालों को खुला क्षेत्र मिल गया है। शिक्षा को व्यापार का जरिया बना लिया गया है।

ऐसे में संघ ने एक प्रस्ताव पारित कर सरकार से यह अपेक्षा की है कि वह शिक्षा का बजट बढ़ाए और निजी शिक्षण संस्थाओं पर नियंत्रण के लिए नियामक संस्थाओं का गठन करे।

उन्होंने कहा कि कुछ नियामक संस्थाएं अभी हैं, लेकिन अधिक कठोर नियामक संस्थाओं की जरूरत है, ताकि इस निजीकरण की प्रवृत्ति को रोका जा सके।

नहीं मिल रही हैं अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं

प्रतीकात्मक फोटो
देशपांडे ने कहा कि कुछ ऐसी ही स्थिति स्वास्थ्य के क्षेत्र में देखी जा रही है। लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। बेहतर  चिकित्सा सेवाएं बड़े शहरों तक केंद्रित हो गई हैं।

संघ ने इस संबंध में पारित प्रस्ताव में कहा है कि सरकार चिकित्सा शिक्षा और गुणवत्तापूर्वक चिकित्सा सेवाओं के लिए बजट बढ़ाए और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए। आयुर्वेद व यूनानी जैसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाए और इनका मानकीकरण किया जाए।

निजी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नियामक संबंधी नियामक लागू करने की बात भी कही गई है। देशपांडे ने इन दो प्रस्तावों के अलावा अन्य सभी प्रश्नों के जवाब टाल दिए और कहा कि रविवार को प्रतिनिधि सभा में हुए सभी निर्णयों के बारे में स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी।
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संघ के उच्च स्तर पर मिल सकता है महिलाओं को प्रतिनिधित्व

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
संघ की शीर्ष नीति निर्धारक संस्थाओं जैसे राष्ट्रीय कार्यकारिणी, अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल आदि में महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि संघ किसी महिला स्वयंसेवक को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल कर सकता है। संघ में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कितना और किस स्तर पर हो, इस पर चर्चा की जा रही है।

संघ में राष्ट्रीय सेविका समिति नाम पर एक आनुशांगिक संगठन पहले से ही काम कर रहा है, लेकिन संघ की किसी सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था जैसे अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एक भी महिला सदस्य नहीं है। सूत्रों का कहना है कि स्वयंसेवकों की गणवेश में बदलाव व महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिए जाने संबंधी बड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है।
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