टाटा समूह की ताज टीसीएस में इंटर्न के तौर पर कैरियर की शुरुआत करने वाले नटराजन चंद्रशेखरन के समूह के शीर्ष पद पर पहुंचने की कहानी काफी मजेदार है। मैराथन दौड़ के शौकीन नटराजन की टीसीएस की मैराथन पारी ने उन्हें टाटा समूह के चेयरमैन पद का स्वाभाविक दावेदार बना दिया था।
वर्ष 1987 में त्रिची रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर की डिग्री हासिल करने वाले चंद्रशेखरन ने उसी साल सीधे टीसीएस में इंटर्न के तौर पर नौकरी शुरू की। अपने लोगों के बीच चंद्रा के नाम से पहचाने जाने वाले नटराजन ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए।
वर्ष 2009 में उन्हें टीसीएस का प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया गया। इस दौरान भारत दुनिया में एक सूचना प्रौद्योगिकी ताकत के रूप में उभर रहा था। फोटोग्राफी के शौकीन चंद्रा ने भविष्य की तस्वीर अपनी आंखों में कैद कर ली और टीसीएस को देश की शीर्ष सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी बना दी।
उन्होंने टीसीएस को उस वक्त शीर्ष पर पहुंचाया, जब टाटा समूह की मुख्य कंपनियां टाटा स्टील और टाटा मोटर्स कुछ खास नहीं कर पा रही थीं। लगता है कि चंद्रा की इसी प्रतिबद्धता ने उन्हें समूह के शीर्ष पर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
मजेदार बात यह है कि चंद्रा विशुद्ध रूप से प्रोफेशनल हैं। उनकी टाटा समूह में कोई हिस्सेदारी नहीं है। वह बिना किसी हिस्सेदारी के समूह के चेयरमैन बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। इतना ही नहीं सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी समूह के चेयरमैन बनने वाले वह पहले गैर पारसी व्यक्ति हैं।