अमेरिका में H-1B वीजा मामले पर विवाद बढ़ता जा रहा है। आईटी इंडस्ट्री बॉडी नैसकॉम ने कहा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप के H1-B वीजा को आगे न बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया तो इसका असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता भी इससे प्रभावित होगी। किसी भी तरह का बदलाव यूएस में अचानक से नौकरियों में कमी लायेगा और इससे प्रोफेशनल्स को समस्या का सामना करना पड़ेगा।
नैसकॉम के अध्यक्ष आर चंद्रशेखर ने कहा कि यूएस में बड़ा स्किल अन्तर है। 2 मिलियन नौकरियों में 1 मिलियन तो केवल आईटी सेक्टर से जुड़ी हुई नौकरियां हैं। बाकी विज्ञान, इंजीनियरिंग और गणित से संबंधित हैं। यह अंतर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। यूएस प्रशासन को यह सारी बातें अपने दिमाग में रखनी होंगी।
कार्नेल लॉ स्कूल के प्रोफेसर स्टेफन याले लोइहर ने कहा कि अगर प्रशासन बदलाव के साथ इस मामले में आगे बढ़ता है तो कंपनियां और H-1B कर्मचारी इस बदलाव के खिलाफ केस कर सकते हैं। इसके अलावा वह बहस कर सकते हैं। यूएस कांग्रेस इस मामले में बदलाव ला सकती है। वे कह सकते हैं कि नियमों में ये बदलाव अनैतिक है क्योंकि H-1B कर्मचारियों ने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रखा था।
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लोइहर ने कहा अगर प्रशासन इस मामले में कोई कार्रवाई करता है तो उन्हें सबसे पहले फेडरल रजिस्टर के रूप में होने वाले बदलाव को पब्लिश करना होगा। इसके बाद उन्हें एक महीने तक इंतजार करना होगा और बदलाव पर पब्लिक की टिप्पणी लेनी होगी, जिसके बाद उन्हें नियम लागू करने से पहले उन टिप्पणियों को पढ़ना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने लगेंगे।