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जहां सात पुश्तों से कोई पढ़ा-लिखा नहीं, उसे पीएम ने बनाया सचिवः कोटेचा

Fri, 17 Nov 2017 01:35 PM IST
संजय मिश्रा/ अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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राजेश कोटेचा - फोटो : social media
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शासन से लेकर राजनीति में नित नए प्रयोग करने के माहिर पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्यूरोक्रेसी में एक बड़ा प्रयोग किया है। उन्होंने एक आयुर्वेदिक वैद्य को आयुष मंत्रालय का सचिव बनाया है। पीएम के इस कदम से बेहद खुश नजर आ रहे आयुष सचिव राजेश कोटेचा ने भावुक होते हुए कहा कि जिसके घर में सात पुश्तों से कोई पढ़ लिखा नहीं है, उसे सचिव सरीखे एक अहम पद की जिम्मेदारी दी गई है। संघ की संस्था विज्ञान भारती के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र की तीन अहम हस्तियों के सम्मान के लिए आयोजित समारोह में कोटेचा ने यह बात कही। 
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इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में जिम्मा संभालने जा रहीं सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि भारत को अपने पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाने का यह सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि जिस तरह चीन ने अपनी पारंपरिक प्रथा को आगे बढ़ाया है, ठीक उसी तरह हमें भी अपने पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान को आगे बढ़ाना चाहिए। यह केवल सरकार के प्रयास से ही संभव नहीं होगा, बल्कि समाज को भी साथ आना होगा। विज्ञान भारती ने गुरुवार को सौम्या स्वामीनाथन, राजेश कोटेचा और गीता कृष्णनन के सम्मान का आयोजन रखा था। 

योग दिवस पर WHO में होगा बड़ा आयेाजन 

राजेश कोटेचा - फोटो : social media
स्वामीनाथन ने बताया कि इस दफे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून 2018 को WHO के मुख्यालय में योग को लेकर बड़ा आयोजन होगा। विश्व में योग को पहचान दिलाने के लिए उन्होंने पीएम मोदी के कदम की सराहना की।
अब तक आईसीएमआर प्रमुख का जिम्मा संभाल रहीं सौम्या ने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में भी पांरपरिक तरीकों को जल्द वैज्ञानिक मान्यता मिलने वाली हैं। डेंगू के आयुर्वेदिक इलाज के तरीकों को लेकर बेलगांव में ट्रायल चल रहा है तो टीबी की बीमारी के इलाज के लिए भी चेन्नई में ट्रायल जारी है।

जल्द ही दोनों ट्रायलों का परिणाम सामने आएगा। उन्होंने कहा कि वे WHO में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते वक्त भारतीय परंपराओं को बढ़ावा देने पर जोर देंगी। उनके साथ ही WHO में बतौर तकनीकी अधिकारी के रूप में कार्य करने जा रहे गीता कृष्णनन ने कहा कि WHO में जाकर वे भारतीय मेडिसिन सिस्टम का प्रचार करेंगे। 

सौम्या का WHO में जाना देश के लिए गर्व- आयुष मंत्री 
केंद्रीय आयुष मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीपद यशो नाईक ने कहा कि सौम्या का WHO में जाना देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि सौम्या पहली भारतीय हैं जो कि इस संस्था के नंबर दो के पद पर हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में सौम्या के योगदान की सराहना करते हुए श्रीपद ने कहा कि सौम्या ने टीबी के इलाज को सस्ता बनाने और इसकी रोकथाम में अहम भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि सौम्या का विश्व स्वास्थ्य संगठन में जाना भारत के  लिए गौरव का क्षण हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पद पर पहुंचकर सौम्या अपने सफल कार्यों के जरिए देश का नाम ऊंचा करेंगी। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ए. जयकुमार ने कहा कि यह हमारी परंपरा है कि जो लोग तरक्की करते हैं या आगे बढ़ते हैं, हम उनका सम्मान करते हैं। 
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क्यों भावुक हुए आयुष सचिव?

राजेश - फोटो : social media
आयुष सचिव राजेश कोटेचा बेहद ही साधारण परिवार से हैं। गुजरात से आयुर्वेद की पढ़ाई के बाद वे सीधे चित्रकूट में नानाजी देशमुख के पास पहुंचे थे। नानाजी ने उन्हें चित्रकूट में स्वास्थ्य शिक्षा शुरू करने का जिम्मा सौंप दिया। उसके बाद उन्होंने जयपुर में भी आयुर्वेद पर काफी काम किया।

उसके बाद वे गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के उपकुलपति बना दिए गए। अब वे भारत सरकार में आयुष विभाग के सचिव बनाए गए हैं। अमूमन इस पद पर अब तक वरिष्ठ आईएएस ही काबिज होते थे, मगर कोटेचा महज एक वैद्य हैं। इसलिए विज्ञान भारती ने सौम्या के साथ उनका भी सम्मान किया।

सम्मान प्राप्ति के बाद भावुक होते हुए कोटेचा ने कहा कि उनको पढ़ाने में उनकी मां का योगदान है और जीवन के संघर्षों में पत्नी का भी अहम साथ मिला। कोटेचा ने कहा कि उनके सात पुश्तों में किसी ने पढ़ाई नहीं की, मगर उनकी रुचि शुरू से पढ़ाई में रही। अब वे आयुष सचिव के पद पर पहुंचकर खुद को बेहद सौभाग्यशाली मान रहे हैं।

आयुष सचिव पर उनकी नियुक्ति पर प्रसन्नता जताते हुए आयुष मंत्री श्रीपद यशो नाईक ने कहा कि उनके मंत्रालय में दो साल में दो सचिव बदल गए। अक्सर रिटायर होने वाले व्यक्ति को सचिव की जिम्मेदारी मिलती थी, जिसकी वजह से मंत्रालय का कार्य प्रभावित होता था। उन्होंने बताया कि बतौर मंत्री उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि एक पूर्णकालिक सचिव उनके विभाग को दें। पीएम ने उनकी गुहार सुनते हुए कोटेचा को सचिव बनाया है। कोटेचा न सिर्फ पूर्णकालिक हैं बल्कि इसी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। 
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