प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने शुक्रवार को वर्चुअल शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे संबंधों को मजबूत करने में आपकी व्यक्तिगत भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। कोविड महामारी के दौरान भी आपने जिस तरह यूएई के भारतीय समुदाय का ध्यान रखा है, उस के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम हाल में यूएई में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। भारत और यूएई आतंकवाद के विरुद्ध कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
उन्होंने कहा कि मुझे बहुत प्रसन्नता है कि हमारे दोनों देश आज कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह उल्लेखनीय है कि इतने महत्वपूर्ण समझौते पर हम तीन महीने से भी कम समय में बातचीत संपन्न कर पाए। सामान्य तौर पर इस प्रकार के समझौते के लिए वर्षों लग जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों की गहरी मित्रता, साझा दृष्टिकोण और विश्वास को दर्शाता है। मुझे विश्वास है कि इससे हमारे आर्थिक संबंधों में एक नया युग आरंभ होगा और हमारा व्यापार अगले पांच वर्षों में 60 बिलियन डॉलर से बढ़कर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल की सफल यूएई यात्रा के बाद कई अमिराती कंपनियों ने जम्मू-कश्मीर में निवेश करने में रूचि दिखाई है। हम यूएई द्वारा जम्मू-कश्मीर में सभी सेक्टर में निवेश का स्वागत करते हैं।
इस दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कारोबारी संबंधों को मजबूत बनाने के लिए समग्र आर्थिक गठजोड़ समझौता (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए। वहीं, आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए भविष्य का खाका भी पेश किया गया। कारोबारी समझौते पर भारत की ओर से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूएई के आर्थिक मामलों के मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मारी ने हस्ताक्षर किए।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद गोयल ने कहा कि यह व्यापक और संतुलित व्यापार समझौता है। यह दोनों पक्षों के लिए व्यापार के व्यापक अवसर खोलता है। समझौता हमारे द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में मदद करेगा।
बयान के मुताबिक, मुक्त व्यापार समझौते से भारत और संयुक्त अरब अमीरात की कंपनियों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। इसमें बेहतर बाजार पहुंच और कम शुल्क दरें शामिल हैं। इस एफटीए से अगले पांच साल में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा 60 अरब डॉलर से बढ़कर 100 अरब डॉलर पहुंच जाने की उम्मीद है।
भारत और यूएई ने व्यापार समझौते के लिए औपचारिक बातचीत पिछले साल सितंबर में शुरू की थी। समझौते में वस्तुओं, सेवाएं, उत्पत्ति के नियमों, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इस प्रकार के समझौतों के जरिए दोनों भागीदार देश व्यापार वाले ज्यादातर वस्तुओं पर सीमा शुल्क में भारी कमी करते हैं या फिर उसे समाप्त कर देते हैं। दोनों देशों के बीच 2020-21 में द्विपक्षीय व्यापार 43.3 अरब डॉलर था।