पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021
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पश्चिम बंगाल की चुनावी बिसात में मोहरे बिछाए जाने लगे हैं। भाजपा ने शनिवार को उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी और एक तरह से तृणमूल कांग्रेस के सामने जंग के लिए ताल ठोक दी। इस सूची में 57 उम्मीदवारों के नाम हैं और एक नाम तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए सुवेंदु अधिकारी का है। केवल इतना ही नहीं, सुवेंदु अधिकारी को जिस नंदीग्राम सीट से प्रत्याशी बनाया गया है, तृणमूल कांग्रेस की ओर से खुद ममता बनर्जी वहां से चुनाव लड़ेंगी। बता दें कि ममता बनर्जी ने पिछला विधानसभा चुनाव भवानीपुर ले लड़ा था।
भाजपा की पहली सूची जारी होने से बंगाल में चुनावी माहौल रोचक हो गया है। सबकी नजरें नंदीग्राम के संग्राम पर भी रहेंगी। बता दें कि तृणमूल में रहते हुए सुवेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के बाद सबसे बड़ा नेता माना जाता था। यूं तो हाल के दिनों में तृणमूल के कई नेताओं ने पाला बदला है लेकिन, अधिकारी ने भाजपा का दामन थामकर ममता को सबसे बड़ा झटका दिया था। शुक्रवार को ममता बनर्जी ने 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का एलान किया था और खुद नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।
जानिए कैसा है नंदीग्राम विधानसभा सीट का इतिहास
राज्य के पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस की ओर से सुवेंदु अधिकारी ही उम्मीदवार थे। तब अधिकारी ने सीपीआई के अब्दुल कबी को हराया था। सुवेंदु का दबदबा नंदीग्राम में कैसा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 66.79 फीसदी वोट मिले थे और दूसरे नंबर पर रहे अब्दुल कबी को 26.49 फीसदी वोट मिले थे। वहीं, भाजपा को यहां सिर्फ 5.32 फीसदी वोट मिले थे। ऐसे में भाजपा को यहां सुवेंदु से काफी उम्मीदें हैं।
नंदीग्राम से खुला था ममता के सत्ता में आने का रास्ता
बता दें कि नंदीग्राम वही जगह है, जहां से ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने का रास्ता खुला था। साल 2007 में ममता बनर्जी का 'मां, माटी और मानुष' आंदोलन की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। नंदीग्राम के संग्राम से ममता बनर्जी ने राज्य में 34 साल से चल रहे लेफ्ट शासन को हराया था और सत्ता पर अपना कब्जा किया था। हालांकि, अधिकारी के प्रभाव को देखते हुए भाजपा आश्वस्त है और उसने दावा किया है कि ममता को कम से कम 50,000 वोट से हराया जाएगा।