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नानावती रिपोर्ट : आयोग ने संजीव भट्ट सहित तीन शीर्ष अधिकारियों पर उठाए सवाल

Thu, 12 Dec 2019 04:02 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
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गोधरा कांड (फाइल फोटो)
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नानावती आयोग ने गुजरात दंगा मामले में तीन पूर्व आईपीएस अधिकारियों संजीव भट्ट, आरबी श्रीकुमार और राहुल शर्मा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए तल्ख टिप्पणी की है। इन अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि दंगों में राज्य सरकार का हाथ था। आयोग ने इनके साक्ष्यों और बयानों को खारिज कर दिया।

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आयोग ने कहा, राज्य खुफिया ब्यूरो के तत्कालीन उपायुक्त भट्ट ने सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों से निजी खुन्नस के कारण मीटिंग की नई कहानी गढ़ी। भट्ट का दावा था कि वह 27 फरवरी, 2002 को सीएम कार्यालय में हुई बैठक में मौजूद थे और सीएम नरेंद्र मोदी ने पुलिस और प्रशासन को बहुसंख्यकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। 

आयोग ने कहा बैठक में भट्ट के होने का कारण नहीं था, क्योंकि वह उच्च अधिकारियों की बैठक थी। वहीं, तत्कालीन डीजीपी श्रीकुमार ने नाराजगी के कारण सरकार के खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे। जबकि अहमदाबाद पुलिस कंट्रोल रूम के उपायुक्त शर्मा ने सच नहीं बताया, इसलिए सुबूत के तौर पर दंगे के शुरुआती दिनों की कॉल डिटेल की सीडी को भरोसेमंद और सही नहीं माना जा सकता।
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गुजरात दंगे में विहिप व बजरंग दल के लोग थे शामिल : आयोग
गुजरात विधानसभा में पेश नानावती आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोधरा कांड के बाद हिंदू समुदाय के लोग बहुत नाराज थे और इसके चलते वे मुसलमानों और उनकी संपत्तियों पर हमले में शामिल हो गए। हालांकि इसमें कोई राजनीतिक या धार्मिक दल शामिल नहीं था। यह जरूर है कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के स्थानीय सदस्यों ने इसमें हिस्सा लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस का कोच सोची-समझी साजिश के तहत जलाया गया, लेकिन इसके बाद भड़के दंगे पूर्व नियोजित या राजनीति से प्रेरित नहीं थे। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी, 2002 को तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था। सरकार ने बाद में आयोग का पुनर्गठन कर इसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जीटी नानावती (अध्यक्ष) के अलावा हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस केजी शाह को सदस्य के तौर पर शामिल किया। जस्टिस शाह के निधन के बाद इसमें हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस एके मेहता को शामिल किया गया।

भाजपा ने कहा, पीएम मोदी के खिलाफ रची गई थी साजिश
भाजपा ने कहा, आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद साफ हो गया कि कांग्रेस और कुछ गैरसरकारी संगठनों ने पीएम मोदी को वैश्विक स्तर पर बदनाम करने के लिए षडयंत्र रचा था। गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा, अब भ्रम दूर हो गए और आयोग ने साफ कर दिया कि यह पीएम मोदी की छवि को खराब करने की कोशिश थी। 

पीएम मोदी पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने बिना किसी को सूचित किए गोधरा का दौरा किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोधरा कांड के बाद पीएम मोदी साबरमती एक्सप्रेस का कोच एस-6 को देखने गए थे। दौरा गुप्त नहीं, बल्कि आधिकारिक था। उनका दौरा साक्ष्यों को मिटाने के लिए नहीं था।

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