Namo Kisan Panchayat: भाजपा सूत्रों से मिली सूचना के अनुसार, गुजरात के साथ-साथ दूसरे राज्यों से विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे दो हजार भाजपा कार्यकर्ताओं को इस योजना को सफल बनाने के लिए लगा दिया गया है। इन पंचायतों में किसानों को केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तरीके भी बताए जाएंगे...
नमो किसान पंचायत (Namo Kisan Panchayat) अभियान के माध्यम से भाजपा गुजरात के ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाने का काम शुरू करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम 20 सितंबर के आसपास शुरू होगा। इस अभियान के अंतर्गत लगभग एक महीने के दौरान गुजरात के 14 हजार से ज्यादा गांवों में ‘नमो किसान पंचायत’ आयोजित की जाएगी। ‘नमो किसान पंचायत’ में केंद्र सरकार के द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की सूचना दी जाएगी। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा स्वयं एक नमो किसान पंचायत में उपस्थित रहकर इस अभियान को हरी झंडी दिखाएंगे।
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केंद्र सरकार लगातार प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए बढ़ावा दे रही है। इसके लिए किसानों को अनेक तरह की सहायता भी दी जा रही है। नमो किसान पंचायत में भी किसानों को प्राकृतिक खेती के विषय में पूरी सूचना दी जाएगी। कृषि मामलों के विशेषज्ञों के द्वारा किसानों को यह बताने की कोशिश रहेगी कि यदि वे क्रमिक रूप से धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो उत्पादन प्रभावित हुए बिना उन्हें ज्यादा लाभ मिल सकता है।
गुजरात में दुग्ध उत्पादन बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। वहां की एक बड़ी किसान आबादी गौ पालन के माध्यम से आय अर्जित करती है। इसे ध्यान में रखते हुए गौपालन को लाभकारी बनाने के तरीकों के बारे में भी किसानों को सूचना दी जाएगी। इस समय गुजरात में लंपी वायरस से गायों की मौत हो रही है, इसे देखते हुए इस कार्यक्रम को बहुत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी
भाजपा सूत्रों से मिली सूचना के अनुसार, गुजरात के साथ-साथ दूसरे राज्यों से विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे दो हजार भाजपा कार्यकर्ताओं को इस योजना को सफल बनाने के लिए लगा दिया गया है। इन पंचायतों में किसानों को केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तरीके भी बताए जाएंगे। भाजपा कार्यकर्ता ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रशिक्षित भी करेंगे।
क्यों है महत्वपूर्ण?
दरअसल, गुजरात में भाजपा की शहरी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनी हुई है। गांधीनगर, सूरत, भरुच और अहमदाबाद के शहरी इलाकों में उसे जबरदस्त समर्थन मिलता है, लेकिन सौराष्ट्र-कच्छ के ग्रामीण इलाकों और आदिवासी क्षेत्रों में उसे कांग्रेस से तगड़ी टक्कर मिलती है। कांग्रेस की कमजोर तैयारियों के बीच भाजपा किसान मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाकर इसी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहती है।