नगालैंड की राजनीति में मंगलवार को बड़ा परिवर्तन देखने को मिला जब नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) का औपचारिक तौर पर नागा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) में विलय हो गया। कोहिमा के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित एनपीएफ के आम सम्मेलन में इस ऐतिहासिक निर्णय को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इस मौके पर करीब 5,000 सक्रिय सदस्य मौजूद रहे।
एनपीएफ के सम्मेलन में एनडीपीपी के विलय को आधिकारिक रूप से स्वीकृति दी गई। यह फैसला पार्टी की सेंट्रल ऑफिस बेयरर्स (सीओबी) और सेंट्रल एक्जीक्यूटिव काउंसिल (सीईसी) की 18 अक्टूबर को हुई बैठक में पारित प्रस्ताव की पुष्टि था। इस दौरान 2025-2030 की नई टीम का गठन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री नेफियू रियो को एनपीएफ का नया अध्यक्ष चुना गया, जबकि विधायक अचुम्बेमो किकोन को महासचिव के पद पर बरकरार रखा गया।
रियो के नेतृत्व में एकजुटता पर जोर
सम्मेलन ने रियो के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी अगुवाई में पार्टी राज्य में विकास और स्थायी शांति के नए युग की शुरुआत करेगी। प्रस्तावों में एनडीपीपी अध्यक्ष चिंगवांग कोन्याक के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना की गई, जिन्होंने एनपीएफ के साथ एकजुटता का मार्ग प्रशस्त किया। पार्टी ने इसे क्षेत्रीय राजनीति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
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नागा राजनीतिक मुद्दे पर केंद्र की ओर आग्रह
एनपीएफ ने अपने प्रस्ताव में भारत सरकार और नागा राजनीतिक समूहों से अपील की कि वे जल्द से जल्द एक सम्मानजनक, स्वीकार्य और समावेशी समाधान तक पहुंचें। पार्टी ने नगालैंड और मणिपुर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) को मजबूत करने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) तथा नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।
ऐतिहासिक पार्टी की नई पहचान
एनपीएफ अध्यक्ष अपोंग पोंगेनर ने इस विलय को ऐतिहासिक पुनर्जागरण और एकता का दिव्य उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह पार्टी नागाओं की आत्मा और पहचान का प्रतीक है। पोंगेनर ने 1963 में बने एनपीएफ के लंबे इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की दूसरी सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी है। उन्होंने कहा कि पार्टी 17 जिलों में अपनी जड़ें बनाए हुए है और अब यह एक मजबूत क्षेत्रीय राजनीतिक इकाई के रूप में उभर रही है।
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किकोन ने दोहराई ‘शांति और एकता’ की नीति
महासचिव अचुम्बेमो किकोन ने एनपीएफ-एनडीपीपी विलय को जनता की एक लंबे समय से चली आ रही इच्छा का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी नागा लोगों की आस्था, अधिकार और भूमि की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। किकोन ने बताया कि एनपीएफ ने हाल ही में फ्री मूवमेंट रेजीम (एफएमआर) खत्म करने और सीमा पर बाड़ लगाने के खिलाफ रैलियां कीं, यह कहते हुए कि नागा एक हैं और एक रहेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने वन नेशन, वन इलेक्शन प्रस्ताव का भी विरोध किया और चेताया कि इससे क्षेत्रीय आवाजें कमजोर होंगी। पार्टी ने इस संबंध में 16वें वित्त आयोग और उच्चस्तरीय समिति को ज्ञापन सौंपा है। एनपीएफ ने चर्च, जनता, वरिष्ठ नागरिकों और सभी समर्थकों का आभार जताया और पूर्व सदस्यों से पार्टी में पुनः शामिल होने की अपील की। सम्मेलन ने सर्वसम्मति से खोंगजह कोन्याक द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों को पारित किया।