ईएनपीओ में नगालैंड के छह जिले आते हैं, जिनमें मोन, तुएनसांग, किफिरे, लोंगलेंग, नोकलाक और शामातोर शामिल हैं। इन जिलों में नगालैंड की सात जनजातियां चांग, खियामनियुंगन, कोन्याक, फोम, संगतम, तिखिर और यिमखिउंग निवास करती हैं।
नगालैंड सरकार के मंत्री केजी कान्ये का कहना है कि ईस्टर्न नगालैंड पीपल्स ऑर्गेनाइजेशन (ईएनपीओ) की अलग राज्य की मांग का समाधान विशेष आर्थिक पैकेज है। ऐसे में नगालैंड सरकार ने केंद्र सरकार से इसकी सिफारिश की है। केजी कान्ये ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईएनपीओ का मामला राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक ज्यादा है। राज्य के पूर्वी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। साथ ही पूर्वी नगालैंड में रहने वाले लोगों का प्रति व्यक्ति आय भी कम है।
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नगालैंड सरकार के प्रवक्ता केजी कान्ये ने कहा कि अगर इन मुद्दों को सुलझा लिया जाए तो अलग राज्य की मांग वाली समस्या सुलझ सकती है। बता दें कि ईएनपीओ में नगालैंड के छह जिले आते हैं, जिनमें मोन, तुएनसांग, किफिरे, लोंगलेंग, नोकलाक और शामातोर शामिल हैं। इन जिलों में नगालैंड की सात जनजातियां चांग, खियामनियुंगन, कोन्याक, फोम, संगतम, तिखिर और यिमखिउंग निवास करती हैं। केंद्र सरकार ने नगालैंड को राज्य का दर्जा देने के बाद बड़ी मात्रा में धन का आवंटन किया है, इस पर केजी कान्ये ने कहा कि केंद्र द्वारा दिए गए फंड जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच सका और इसकी आवंटन प्रक्रिया भी सही नहीं रही।
ईएनपीओ और केंद्र सरकार लंबे समय से बातचीत कर रहे हैं लेकिन इस बातचीत में अभी तक राज्य सरकार शामिल नहीं थी। अब राज्य सरकार को भी बातचीत में शामिल किया गया है, जिस पर नगालैंड सरकार ने खुशी जाहिर की। कान्ये ने कहा कि राज्य सरकार के बातचीत में शामिल होने को प्रक्रिया को बाधित करने या हस्तक्षेप करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत में हुई देरी में राज्य सरकार का कोई हाथ नहीं है। ईएनपीओ ने ही राज्य सरकार से बातचीत में शामिल होने की पेशकश की है।